उत्तर प्रदेशलखनऊ

छापा मारकर 50,000 रुपये की इनामी महिला प्रियंका सिंह को किया गिरफ्तार

"सुरक्षित निवेश" का लालच, फिर अरबों का गबन

अजीत मिश्रा (खोजी)

लखनऊ।। राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके पीजीआई में उस समय सनसनी फैल गई, जब यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की टीम ने एक हाई-प्रोफाइल अपार्टमेंट की 12वीं मंजिल पर छापा मारकर 50,000 रुपये की इनामी महिला प्रियंका सिंह को गिरफ्तार कर लिया।फ्लैट नंबर 1205 में छिपी यह “धोखाधड़ी की रानी” 2011 के एक बड़े निवेश घोटाले की अहम कड़ी थी, जिसमें “सुरक्षित फिक्स्ड डिपॉजिट” की आड़ में मासूम लोगों की गाढ़ी कमाई लूट ली गई थी। बुधवार को हुई इस गिरफ्तारी ने न केवल ललितपुर थाने में दर्ज 2019 के मुकदमे को नई दिशा दी, बल्कि पूरे पूर्वांचल में फैले एक धोखाधड़ी के नेटवर्क का पर्दाफाश करने का रास्ता भी खोल दिया।

💫 सौभाग्यम अपार्टमेंट में छिपी थी प्रियंका सिंह—

सूत्रों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर, एसटीएफ टीम ने प्रियंका सिंह की लोकेशन ट्रेस की। निगरानी से पता चला कि वह लखनऊ के सौभाग्यम अपार्टमेंट स्थित अपने फ्लैट में छिपी हुई थी। बुधवार सुबह जब टीम ने दरवाज़ा खटखटाया, तो प्रियंका के चेहरे पर डर साफ़ दिखाई दे रहा था। गिरफ़्तारी के वक़्त वह सादे कपड़ों में थीं, लेकिन उनके चेहरे पर इस बात का डर साफ़ झलक रहा था कि अब खेल ख़त्म हो गया है।

💫 हज़रतगंज में खोला गया दफ़्तर—

पूछताछ के दौरान प्रियंका के खुलासे किसी बॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं थे। उन्होंने कबूल किया कि 2011 में उन्होंने अपने पति राजेश कुमार सिंह, दुर्गेश जायसवाल और विक्रांत त्रिपाठी के साथ मिलकर जेकेवी लैंड एंड डेवलपर्स इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक कंपनी शुरू की थी। कंपनी का पंजीकृत कार्यालय लखनऊ के हज़रतगंज में महात्मा गांधी मार्ग पर स्थित था, जबकि ललितपुर में एक शाखा कार्यालय खोला गया था। दीपक शुक्ला और आशीष श्रीवास्तव को निदेशक नियुक्त किया गया था, जबकि प्रियंका ख़ुद सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत थीं।

💫 “सुरक्षित निवेश” का लालच, फिर अरबों का गबन—

कंपनी का तरीका बेहद शातिराना था। लोगों को लुभावने विज्ञापनों और मीठे वादों का लालच दिया जाता था। “आपके पैसे पर 12-15% सालाना रिटर्न, पूरी तरह से सुरक्षित FD स्कीम।” इस लालच में लोगों को बैंक खाते खुलवाकर एफडी के नाम पर कंपनी के खाते में पैसे ट्रांसफर करवा लिए जाते थे। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक, बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, कोई भी इस जाल से बच नहीं पाता था।

💫 इन जिलों के लोगों के साथ हुई ‘ठगी’

ललितपुर, आजमगढ़, वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर, भदोही, मऊ, महोबा और लखनऊ में फैले इस नेटवर्क में करोड़ों रुपये जमा कराए गए, लेकिन जैसे ही रकम बड़ी हुई, कंपनी के मालिक गायब हो गए। लखनऊ स्थित कार्यालय बंद हो गया, फोन बंद हो गए और निवेशकों के हाथ धोखाधड़ी के अलावा कुछ नहीं लगा। पहला मामला 2019 में ललितपुर थाने में दर्ज हुआ था, जिसमें प्रियंका सिंह मुख्य आरोपी थीं। तब से वह फरार हैं।

💫 प्रियंका सिंह पर 50,000 रुपये का इनाम था।

इससे पहले, 29 जून, 2025 को पुलिस ने कंपनी के निदेशक आशीष श्रीवास्तव को मध्य प्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया था। इसके बाद, डीआईजी झांसी ने प्रियंका पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया था। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के मुताबिक, प्रियंका के खिलाफ 18 मामले दर्ज हैं, जो सभी धोखाधड़ी, जालसाजी और निवेश धोखाधड़ी से जुड़े हैं। एसटीएफ ने कहा कि प्रियंका सिंह की गिरफ्तारी सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि पूरे रैकेट पर एक बड़ा प्रहार है। प्रियंका से मिली जानकारी के आधार पर अब वे बाकी फरार आरोपियों की तलाश कर रहे हैं।

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