
सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 *जिले में घटित एक अत्यंत गंभीर एवं सनसनीखेज प्रकरण का पुलिस ने त्वरित एवं वैज्ञानिक जांच के माध्यम से सफलतापूर्वक खुलासा किया है। मामले में मुख्य आरोपी एक डॉक्टर है, जिसने अपने दो सहयोगियों (पैथोलॉजी संचालक) के साथ मिलकर सुनियोजित षड्यंत्र रचते हुए अपनी ही पत्नी की हत्या कर घटना को दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया। दिनांक 21/03/2026 की रात्रि लगभग 04:00 बजे आरोपी डॉक्टर अपनी पत्नी को कार में लेकर चनाटोरिया टोल टैक्स के पास पहुंचा। घटना से पूर्व आरोपी द्वारा पत्नी के मायके पक्ष को फोन कर यह बताया गया कि उसकी पत्नी को हार्ट अटैक आया है और वह उसे अस्पताल लेकर जा रहा है। इसके बाद चनाटोरिया के पास कार में आग लगने की घटना के पश्चात पुनः फोन कर बताया गया कि गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है और उसमें आग लग गई है। घटना प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत होने पर पुलिस द्वारा सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक तरीके से जांच की गई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी डॉक्टर के किसी अन्य महिला से अवैध संबंध थे, जिसके कारण पति-पत्नी के बीच लगातार विवाद होता रहता था। इसी कारण आरोपी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर पत्नी की हत्या की साजिश रची और उसे अंजाम दिया। आरोपी डॉक्टर ने अपने दोनों सहयोगियों को इस अपराध में शामिल करने हेतु प्रत्येक को 2-2 लाख रुपये का लालच दिया था। तीनों के बीच पूर्व से घनिष्ठ संबंध थे, जिसके चलते यह जघन्य अपराध संगठित रूप से किया गया। आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त पेट्रोल भरकर जिस कुप्पी में लाया था कुप्पी एवं माचिस को घटनास्थल के समीप झाड़ियों से विधिवत जप्त किया गया, जो इस प्रकरण के महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। पुलिस अधीक्षक विकाश कुमार शाहवाल एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश कुमार सिन्हा के निर्देशन में थाना प्रभारी सानोधा द्वारा अत्यंत सूक्ष्मता एवं प्रोफेशनल तरीके से जांच की गई। साक्ष्यों के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों नीलेश पिता भागवत कुर्मी उम्र 37 वर्ष निवासी ग्राम सिमरिया, थाना गड़ाकोटा,रामकृष्ण पिता हरगोविंद कुर्मी उम्र 25 वर्ष निवासी ग्राम कुमेरिया भटोली थाना गढ़ाकोटा, शुभम पिता गोपाल कुर्मी उम्र 23 वर्ष निवासी ग्राम सिंगपुर कला थाना गढ़ाकोटा हाल बजरंग वार्ड गढ़ाकोटा को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रकरण की विवेचना में थाना प्रभारी सानोधा भरतसिंह ठाकुर और थाना के सहायक उप निरीक्षक जयसिंह, शेषनारायण दुबे, प्रधान आरक्षक पुरुषोत्तम, उमेश, राजेश, विष्णु, आरक्षक जगदीश, राजेन्द्र, प्रमोद राहुल, हेमंत, देवेन्द्र और नीरज की सराहनीय भूमिका रही। पुलिस की प्रभावी एवं वैज्ञानिक जांच से स्पष्ट हुआ कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या का मामला है, जिसमें घटना को छिपाने हेतु वाहन में आग लगाकर एक्सीडेंट का रूप देने का प्रयास किया गया।



