
शाहाबाद से सामने आई गंभीर जानकारी ने प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी नियमों की सच्चाई पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ कर्मचारी जो बाहर से शाहाबाद में नौकरी करने आते हैं, वे सरकारी आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए न केवल ड्यूटी के निर्धारित समय का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि फर्जी दिव्यांग पास का इस्तेमाल कर सरकारी खजाने को लाखों रुपये का नुकसान भी पहुंचा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये कर्मचारी सुबह करीब 10:00 बजे अपनी ड्यूटी पर पहुंचते हैं और दोपहर 1:30 से 2:00 बजे के बीच शाहजहांपुर से कानपुर जाने वाली रोडवेज बस में फर्जी दिव्यांग पास के सहारे सवार होकर वापस अपने घर चले जाते हैं।
सबसे गंभीर और चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस पूरे खेल में बसों के परिचालकों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। आरोप है कि परिचालक जानबूझकर फर्जी दिव्यांग पास को वैध मानते हुए यात्रियों को मुफ्त या रियायती यात्रा की सुविधा दे रहे हैं, जिससे सरकार को प्रतिदिन और मासिक स्तर पर लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। यह न केवल आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है, बल्कि वास्तविक दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों और सम्मान पर भी सीधा प्रहार है, जिन्हें सरकार द्वारा यह सुविधा सामाजिक न्याय के तहत प्रदान की जाती है।
गौरतलब है कि शासन द्वारा स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि कोई भी कर्मचारी जिस स्थान पर ड्यूटी कर रहा है, उसे वहीं 24 घंटे उपलब्ध रहना होगा, ताकि आपात स्थिति में सेवाएं बाधित न हों और प्रशासनिक कार्य सुचारु रूप से चलते रहें। इसके बावजूद कुछ कर्मचारी मनमानी करते हुए न केवल समय से पहले ड्यूटी छोड़ रहे हैं, बल्कि शासनादेशों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। यह स्थिति न सिर्फ प्रशासनिक अनुशासन को कमजोर करती है, बल्कि ईमानदारी से कार्य करने वाले कर्मचारियों के मनोबल को भी तोड़ती है।
स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने वाले दलालों, उनका इस्तेमाल करने वाले कर्मचारियों और मिलीभगत करने वाले रोडवेज कर्मियों की पूरी श्रृंखला सामने आ सकती है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है और अब तक किसी ठोस कार्रवाई के अभाव में और अधिक फैल चुका है।
प्रशासन और परिवहन विभाग के लिए यह मामला एक बड़ी चेतावनी है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का इस तरह दुरुपयोग होता रहेगा और इसका सीधा असर जनहित और राजस्व पर पड़ेगा। लोगों की मांग है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी कर्मचारियों और परिचालकों के खिलाफ कड़ी विभागीय व कानूनी कार्रवाई हो, फर्जी दिव्यांग पास तत्काल निरस्त किए जाएं और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र लागू किया जाए। यह मामला न केवल नियमों की अवहेलना का है, बल्कि व्यवस्था की साख से जुड़ा एक गंभीर सवाल भी है।










