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बस्ती ।। “कप्तानगंज में मनरेगा का बड़ा फर्जीवाड़ा: प्रधान और प्रतिनिधि की जुगलबंदी में सरकारी धन की लूट”

"रामगढ़ उर्फ कठार जंगल में मनरेगा का तमाशा: 9:00 बजे हाजिरी, 9:28 पर कार्यस्थल मिला खाली"

अजीत मिश्रा (खोजी)

🙈 भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता मनरेगा, कागजों पर मज़दूर और मौके पर सन्नाटा🙈

बुधवार 14 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

कप्तानगंज (बस्ती)।। विकास खंड कप्तानगंज के अंतर्गत ग्राम पंचायत रामगढ़ उर्फ कथार जंगल (गांव अकलखोर) में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की नई इबारत लिख रही है। जहाँ एक ओर सरकार ग्रामीणों को रोजगार देने का दावा करती है, वहीं धरातल पर जिम्मेदार लोग सरकारी धन का बंदरबांट करने में जुटे हैं।

🔥 9:00 बजे हाजिरी, 9:28 पर मैदान खाली🔥

आज सुबह जब अकलखोर गांव में मनरेगा कार्य का रियलिटी चेक किया गया, तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार सुबह 9:00 बजे मजदूरों की उपस्थिति (अटेंडेंस) दर्ज कर ली गई, लेकिन ठीक 9:28 बजे कार्यस्थल पर एक भी मजदूर मौजूद नहीं मिला। सवाल यह उठता है कि अगर मजदूर काम पर नहीं हैं, तो हाजिरी किसकी भरी गई?

✍️ मिलीभगत का खेल:— प्रधान और प्रतिनिधि के संरक्षण में धांधली

ग्रामीणों के बीच यह चर्चा का विषय है कि ग्राम प्रधान काशीराम और उनके प्रतिनिधि रामजीत यादव के संरक्षण में यह खेल लंबे समय से चल रहा है। बिना काम किए मस्टरोल भरकर सरकारी बजट को ठिकाने लगाया जा रहा है। यह सीधे तौर पर उन गरीब मजदूरों के हक पर डाका है जो वास्तव में काम की तलाश में भटक रहे हैं।

✍️ भ्रष्टाचार के कुछ अनसुलझे सवाल:—

🔥 जब मौके पर कोई मजदूर नहीं था, तो ऑनलाइन हाजिरी कैसे दर्ज हो गई?

🔥 क्या संबंधित तकनीकी सहायक (TA) और सचिव ने कार्यस्थल का निरीक्षण किया?

🔥फर्जी हाजिरी के जरिए निकाले जाने वाले पैसे आखिर किसकी जेब में जा रहे हैं?

💫 प्रशासनिक चुप्पी पर उठते सवाल:—

यह घटना केवल एक दिन की नहीं है, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से किए जा रहे भ्रष्टाचार का हिस्सा प्रतीत होती है। यदि समय रहते उच्चाधिकारियों ने इस पर संज्ञान नहीं लिया, तो “अकलखोर” जैसे कई गांवों में मनरेगा केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।

✍️ मांग:— क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने जिलाधिकारी बस्ती और खंड विकास अधिकारी से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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