
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। पंचायत भवन या निजी विला? सरकारी सिस्टम को ठेंगा दिखा रहे रसूखदार।।
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर): सरकार गांवों के विकास और जनसुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर पंचायत भवनों का निर्माण कराती है, ताकि ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। लेकिन सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज विकास खण्ड अंतर्गत भगवानपुर ग्राम पंचायत में हकीकत इसके उलट है। यहाँ पंचायत भवन ग्रामीणों की सेवा के लिए नहीं, बल्कि रसूखदारों के ‘आरामगाह’ के रूप में तब्दील हो चुका है।
💫सरकारी संपत्ति पर ‘कब्जा’, जिम्मेदार मौन
हैरानी की बात यह है कि जिस भवन में पंचायत की बैठकें होनी चाहिए थीं और जहाँ से विकास की रूपरेखा तैयार होनी थी, वहाँ अब तख्ते बिछ चुके हैं और चूल्हे जल रहे हैं। पंचायत भवन के भीतर सोने, खाने और रहने का पूरा तामझाम इस तरह सजाया गया है जैसे यह कोई सरकारी कार्यालय न होकर किसी का निजी आशियाना हो।
💫ग्रामीणों की सुध लेने वाला कोई नहीं
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस खुलेआम हो रहे दुरुपयोग की जानकारी होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आँखें मूँदे बैठे हैं। ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि:
👉पंचायत से जुड़े कार्यों के लिए उन्हें भटकना पड़ता है।
👉सरकारी भवन का उपयोग निजी स्वार्थ के लिए किया जा रहा है।
👉प्रशासन की अनदेखी के कारण सरकारी संपत्ति का मखौल उड़ रहा है।
💫बड़ा सवाल: कब जागेगा प्रशासन?
भगवानपुर की यह तस्वीर पंचायती राज व्यवस्था के दावों पर करारा तमाचा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इन “अवैध निवासियों” पर कार्रवाई कर पंचायत भवन को मुक्त कराएगा? या फिर कागजों में ‘रामराज्य’ दिखाकर जमीनी हकीकत से मुंह मोड़ लिया जाएगा?
“यह सरकारी धन और सार्वजनिक संपत्ति का खुला अपमान है। हम मांग करते हैं कि इसकी तत्काल जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।” — आक्रोशित ग्रामीण














