
🚨 लोहिया अस्पताल में बवाल: महिला अधिवक्ताओं से मारपीट प्रकरण के बीच मेडिकल के दौरान हंगामा, महिला कांस्टेबल पर बदतमीजी और मामले में लीपापोती के आरोप
लोहिया अस्पताल में महिला अधिवक्ताओं के साथ हुई मारपीट के मामले ने अब नया विवाद खड़ा कर दिया है। घटना के बाद जब पीड़ित महिला अधिवक्ताओं का मेडिकल परीक्षण कराने के लिए अधिवक्ता संगठन की टीम अस्पताल पहुंची, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मी के व्यवहार को लेकर नया विवाद सामने आ गया। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया है कि मेडिकल प्रक्रिया के दौरान साथ आई एक महिला कांस्टेबल ने अधिवक्ताओं के साथ बदतमीजी की और उनका रवैया बेहद आपत्तिजनक था।
जानकारी के अनुसार हाल ही में महिला अधिवक्ताओं के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद पीड़ित पक्ष को चिकित्सीय परीक्षण के लिए लोहिया अस्पताल लाया गया था। उनके साथ अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था, जिसमें कई वरिष्ठ अधिवक्ता और अधिवक्ता संगठन के सदस्य शामिल थे। अधिवक्ताओं का कहना है कि वे केवल पीड़ित महिला अधिवक्ताओं के साथ खड़े रहने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से सम्पन्न कराने के उद्देश्य से अस्पताल पहुंचे थे।
लेकिन आरोप है कि मेडिकल प्रक्रिया के दौरान मौके पर मौजूद महिला कांस्टेबल डॉली मिश्रा का व्यवहार अधिवक्ताओं के प्रति अचानक बदल गया। अधिवक्ताओं का कहना है कि कांस्टेबल ने उनसे तीखे शब्दों में बात करनी शुरू कर दी और कई बार ऐसा लगा कि वह अधिवक्ताओं की मौजूदगी से नाराज हैं।
मौके पर मौजूद अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि कांस्टेबल का व्यवहार ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह इस पूरे प्रकरण में लीपापोती करने के उद्देश्य से आई हों और उन्हें यह पसंद नहीं आ रहा था कि अधिवक्ता मेडिकल प्रक्रिया के दौरान वहां मौजूद रहें। इस दौरान अधिवक्ताओं और महिला कांस्टेबल के बीच तीखी नोकझोंक भी हो गई, जिससे अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए तनाव का माहौल बन गया।
अधिवक्ता शक्ति परिषद् से जुड़े सदस्यों का कहना है कि जब कोई पीड़ित पक्ष मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल पहुंचता है तो पुलिस का कर्तव्य होता है कि वह पीड़ितों को सुरक्षा और सहयोग प्रदान करे। लेकिन इस मामले में अधिवक्ताओं के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, उससे अधिवक्ता समुदाय में नाराजगी फैल गई है।
अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि यदि इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अभद्रता की पुष्टि होती है तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
घटना के बाद अधिवक्ता समुदाय में इस पूरे प्रकरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इस मुद्दे को उच्च स्तर तक उठाया जाएगा। वहीं कुछ अधिवक्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
फिलहाल इस प्रकरण को लेकर पुलिस और अधिवक्ता समुदाय के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
इस घटना के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यदि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर भी पीड़ितों और उनके साथ आए लोगों को इस प्रकार की परिस्थितियों का सामना करना पड़े, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और आरोपों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
✍ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – हलचल इंडिया न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – दैनिक आशंका बुलेटिन
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