उत्तर प्रदेशबस्ती

।। आत्महत्या की बढ़ती घटनाएँ समाज, प्रशासन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता।।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। बढ़ती आत्महत्या की घटनाएँ: क्यों बढ़ रहा है खतरा।।

02 दिसंबर 25, उत्तर प्रदेश

देश में आत्महत्या की बढ़ती घटनाएँ समाज, प्रशासन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। हालिया अध्ययनों, मनोवैज्ञानिक शोध और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि आत्महत्या का कारण किसी एक कारक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और मानसिक दबावों का जटिल मिश्रण है। लगातार बढ़ती घटनाएँ बताती हैं कि समस्या गहरी है और समाधान व्यापक स्तर पर सोचे बिना संभव नहीं।

💫 परिवारिक तनाव और रिश्तों की टूटन—

NCRB के अनुसार देश में आत्महत्या की सबसे बड़ी वजह परिवारिक विवाद, रिश्तों में तनाव और घरेलू कलह है। खराब वैवाहिक संबंध, दहेज विवाद, लगातार झगड़े या परिवार से मिलने वाला भावनात्मक सहयोग खत्म हो जाना व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर बना देता है। कई मामलों में घरेलू झगड़े और अपमान लंबे समय तक व्यक्ति के दिमाग पर असर डालते हैं, जिससे आत्मघाती कदम उठाने की संभावना बढ़ जाती है।

💫 मानसिक बीमारी और अवसाद—

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती आत्महत्याओं में अवसाद और अन्य मानसिक बीमारियाँ प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। कैंसर, लकवा या पुरानी बीमारियों के साथ जी रहे लोग अक्सर गहरी मानसिक पीड़ा में चले जाते हैं। मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच, इलाज में लापरवाही और सामाजिक कलंक इस समस्या को और बढ़ा देते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अवसाद के शुरुआती संकेत पहचान लिए जाएँ तो कई जिंदगियाँ बचाई जा सकती हैं।

💫 आर्थिक दबाव और बेरोजगारी—

आर्थिक अस्थिरता भी आत्महत्या का बड़ा कारण बनकर उभरी है। किसानों, छोटे व्यापारियों और बेरोजगार युवाओं में तनाव बेहद बढ़ गया है। फसल खराब होने, कर्ज बढ़ने, रोजगार न मिलने या व्यापार में घाटा होने की वजह से लोग भारी मानसिक दबाव झेलते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियाँ कई लोगों को टूटने पर मजबूर कर देती हैं।

💫 छात्रों में बढ़ता तनाव—

पढ़ाई का बोझ, प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव और करियर को लेकर असुरक्षा के कारण छात्रों में आत्महत्या की घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं। कई राज्यों में स्कूल और कॉलेज छात्रों के लिए काउंसलिंग को अनिवार्य बनाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार और शिक्षा व्यवस्था दोनों को मिलकर एक सहायक वातावरण तैयार करना होगा।

👉 इमैच्योर प्रेम भी लड़के और लड़कियों की आत्महत्या का कारण बन रहा है | किशोरावस्था में लड़की लड़कियों के बीच आकर्षण एक सामान्य प्रक्रिया है,लेकिन इस डिजिटल युग में फिल्मों और सीरियल की कहानियों में खुद को देखते हैं और वैसा ना होने पानी की दशा में भी अवसाद में आकर आत्महत्या की तरफ कदम बढ़ाते हैं।

👉 गली गली कुकुरमुत्ता की तरह फैल रहे कोचिंग सेंटर भी परोक्ष रूप से आत्महत्या का कारण बन रहे हैं | अधिकांश कोचिंग सेंटरों छात्र इसलिए पढ़ने जाते हैं कि वहां उनको खुला वातावरण मिलता है और उसके आड में वह पढ़ाई कम प्रेम के चक्कर में ज्यादा पड़ जाते हैं।

💫 नशा और अकेलापन भी बना कारण—

शराब और ड्रग्स का सेवन निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है और अवसाद को गहरा करता है। आधुनिक जीवनशैली में बढ़ता अकेलापन, सोशल मीडिया पर निरंतर तुलना और वास्तविक सामाजिक संपर्कों में कमी भी मानसिक समस्याओं की बड़ी वजह बन रही है। कई युवा और वयस्क ऑनलाइन दुनिया में तो जुड़े रहते हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में काफ़ी अकेलापन महसूस करते हैं।

💫 रोकथाम कैसे संभव—

विशेषज्ञ बताते हैं कि आत्महत्या की रोकथाम तभी संभव है जब समाज, परिवार और प्रशासन तीनों मोर्चों पर मिलकर काम करें।

⭐ स्कूलों और कॉलेजों में नियमित काउंसलिंग सुविधा हो।

⭐ मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने का माहौल बने।

⭐ गांव और शहरों में हेल्पलाइन और सामुदायिक सहायता केंद्र सक्रिय हों।

⭐ आर्थिक संकट से जूझ रहे लोगों के लिए त्वरित सरकारी मदद और परामर्श उपलब्ध कराया जाए।

⭐ मीडिया को भी आत्महत्या की खबरों को संवेदनशील तरीके से रिपोर्ट करने की जरूरत है ताकि इसका गलत प्रभाव न पड़े।

📢 निष्कर्ष—

बढ़ती आत्महत्या की घटनाएँ सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक ढांचे पर गहरे सवाल हैं। यह स्पष्ट है कि समस्या केवल व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था के सामने खड़ी चुनौती है। समय रहते पहचान, काउंसलिंग, सामुदायिक सहयोग और भावनात्मक सहारा अनेक जीवन बचा सकता है। समाज जितना अधिक संवेदनशील और सहायता-उन्मुख बनेगा, आत्महत्या की घटनाएँ उतनी ही कम होंगी।

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