उत्तर प्रदेशबस्ती

।। फिर बेखौफ दौड़ रहे ओवरलोड गन्ना ट्रक, अभियान थमते ही तेज हुई मनमानी।।

।। पुनः परिवहन विभाग कर रहा है फुटहिया जैसी दुर्घटना का इंतज़ार।।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। नहीं रुक रहा है ओवरलोड/ओवरहाइट गन्ना ट्रकों का संचालन, कुछ दिनों से लगातार हो रही कार्यवाही रुकी।।

👉 पुनः परिवहन विभाग कर रहा है फुटहिया जैसी दुर्घटना का इंतज़ार।

फिर बेखौफ दौड़ रहे ओवरलोड गन्ना ट्रक, अभियान थमते ही तेज हुई मनमानी—प्रशासन की ढिलाई से बढ़ा दुर्घटना का खतरा।

उत्तर प्रदेश।

बस्ती, 11 दिसंबर 2025 ।।गन्ना सीजन शुरू होते ही ओवरलोडिंग और ओवरहाइटिंग करने वाले ट्रकों की दौड़ एक बार फिर सड़कों पर खतरनाक गति से लौट आई है।

फुटहिया पर हुई दुर्घटना के बाद होश में आये पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा तीन से चार दिनों तक चलाए गए संयुक्त अभियान के बाद कुछ समय के लिए स्थिति सुधरती दिखी थी, लेकिन अब अभियान धीमा पड़ते ही चालकों की मनमानी दोबारा चरम पर पहुंच गई है। ट्रकों की ओवरलोडिंग जहां सड़क सुरक्षा को चुनौती दे रही है, वहीं ओवरहाइटिंग के कारण हाईवे पर लगे बैरिकेड, तार और बिजली के तारों को भी लगातार नुकसान पहुंच रहा है।

लोगों का कहना है कि पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा चलाया गया अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह गया। परिवहन विभाग ने कुछ ट्रकों का चालान काटकर खानापूर्ति तो कर दी इससे ट्रक चालकों में यह संदेश गया कि सख्ती अस्थायी है और जैसे ही अभियान धीमा हुआ, ओवरलोड और ओवरहाइट ट्रकों की लाइनें फिर सड़कों पर दिखने लगीं।

⭐ चालकों को पता है कब नहीं होगी चेकिंग, उसी हिसाब से चल रही ढुलाई:—

गन्ना ढुलाई करने वाले चालकों ने भी प्रशासन की इस कमजोर व्यवस्था को समझते हुए अपनी रणनीति तय कर ली है। स्थानीय सूत्र बताते हैं कि उन्हें पता है कि अभियान अधिकतर रात 9 बजे से 12 बजे तक ही चलता है। इसलिए वे ओवरलोड ट्रक सुरक्षित समय में दो शिफ्टों में चलाते हैं—पहली शिफ्ट दोपहर से रात 9 बजे तक और दूसरी शिफ्ट रात 1 बजे से सुबह 10 बजे तक। इस दौरान सड़कों पर ट्रक बेखौफ रफ्तार से दौड़ते हैं, जिससे आम लोगों की जान जोखिम में पड़ती है।

⭐ कभी भी हो सकती है बड़ी दुर्घटना, लेकिन प्रशासन में सन्नाटा:—

ओवरलोड ट्रकों की वजह से हाईवे की हालत पहले ही खराब है, ऊपर से ओवरहाइटिंग के कारण पुलों, बिजली लाइनों और सड़क किनारे बने ढांचों को भारी नुकसान होता है। कई बार इन ट्रकों की ऊंचाई इतनी ज्यादा होती है कि बैरिकेड तक टूट जाते हैं। इसके बावजूद प्रशासन की कार्रवाई केवल चंद दिनों तक सीमित रहती है, जिसके बाद सब कुछ फिर पुराने ढर्रे पर आ जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन शायद किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, तभी स्थायी और सख्त कार्रवाई होगी। पिछले दिनों ओवरलोड ट्रकों के कारण कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन इससे कोई सीख नहीं ली जा रही। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत के कारण भी यह अवैध ढुलाई जारी रहती है, क्योंकि अभियान बंद होते ही ट्रकों का रुतबा पहले जैसा हो जाता है।

अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन सड़क सुरक्षा को लेकर कोई लंबी अवधि का ठोस समाधान तैयार करेगा या फिर गन्ना सीजन भर लोगों की जान इसी तरह खतरे में पड़ी रहेगी।

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