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जल शोधन संयंत्रों की प्रयोगशालाओं में जल गुणवत्ता का दैनिक परीक्षण अनिवार्य : कलेक्टर जमुना भिड़े

पुरानी व जर्जर पाइपलाइनों की सूची बनाकर प्राथमिकता से सुधार कार्य कराने के निर्देश जिला स्तरीय समीक्षा एवं निगरानी समिति की बैठक में स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने पर जोर

निवाड़ी। जिलेवासियों को स्वच्छ, सुरक्षित एवं गुणवत्तायुक्त पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कलेक्टर श्रीमती जमुना भिड़े की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय समीक्षा एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर ने नल-जल योजनाओं के अंतर्गत प्रदाय किए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा जलजनित बीमारियों जैसे उल्टी-दस्त एवं हैजा की प्रभावी रोकथाम हेतु संबंधित अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए।
कलेक्टर श्रीमती भिड़े ने निर्देशित किया कि जिले के ऐसे संवेदनशील नगरीय क्षेत्रों की पहचान की जाए, जहाँ पूर्व में जलजनित बीमारियों के मामले सामने आए हैं। साथ ही निचले इलाके, नालों के समीप से गुजरने वाली पाइपलाइनें, तथा पुरानी व जर्जर पाइपलाइन वाले ‘क्रिटिकल क्षेत्रों’ की सूची तैयार कर वहां प्राथमिकता के आधार पर सुधार कार्य सुनिश्चित किए जाएं।
उन्होंने कहा कि जल शोधन संयंत्रों पर स्थापित प्रयोगशालाओं में जल की गुणवत्ता का दैनिक परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए तथा उसका विधिवत रिकॉर्ड संधारित किया जाए। इसके अतिरिक्त शोधित जल की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग की प्रयोगशालाओं में समय-समय पर क्रॉस सैंपल चेकिंग कराई जाए।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि पाइपलाइन के अंतिम छोर तक जुड़े घरेलू नल कनेक्शनों में रेसिड्यूअल क्लोरीन की मात्रा का सघन परीक्षण किया जाए। राइजिंग मेन एवं वितरण पाइपलाइनों में लगे क्षतिग्रस्त वाल्व व वाल्व चैंबरों का तत्काल सुधार सर्वोच्च प्राथमिकता पर किया जाए, जिससे बाहरी गंदगी जल आपूर्ति में मिश्रित न हो सके।
जहाँ सीवर लाइनें उपलब्ध हैं, वहां उनके नियमित संधारण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी स्थिति में पेयजल प्रदूषित न हो। इसके साथ ही जल शोधन में प्रयुक्त केमिकल्स की गुणवत्ता एवं पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
कलेक्टर ने निर्देशित किया कि प्रत्येक वार्ड से कम से कम 10 पानी के सैंपल लेकर उनकी सघन जांच कराई जाए तथा प्रत्येक 15 दिन के अंतराल पर उच्च स्तरीय टंकियों, ट्यूबवेल एवं संपवेल की वाटर टेस्टिंग अनिवार्य रूप से की जाए। नगर निकायों के अमले को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने हेतु PHE विभाग के विशेषज्ञों के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।
कलेक्टर श्रीमती भिड़े ने स्पष्ट किया कि नगर निकायों की जल प्रदाय व्यवस्था का किसी भी समय आकस्मिक निरीक्षण किया जा सकता है, अतः सभी मुख्य नगरपालिका अधिकारी व्यवस्थाएं सदैव दुरुस्त रखें।
बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्री रोहन सक्सेना सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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