
कटनी,
कटनी में 5 साल से बंद खदान में चलता रहा अवैध खनन, अब एक पोकलेन जब्त कर पीठ थपथपा रहा विभाग!
खिरवा-जमुआनी कला की खदान में वर्षों से पत्थर निकला, जिम्मेदार सोते रहे… अचानक किसके इशारे पर जागी माइनिंग टीम?
कटनी। जिले में अवैध खनन का काला खेल कोई नई बात नहीं, लेकिन इस बार मामला सीधे जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। ग्राम खिरवा के पास जमुआनी कला क्षेत्र की वह स्टोन खदान, जो कागजों में पिछले 5 वर्षों से बंद बताई जा रही थी, वहां लगातार धड़ल्ले से अवैध उत्खनन चलता रहा। पहाड़ कटते रहे, मशीनें गरजती रहीं, माल निकलता रहा… और जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठा रहा।
अब अचानक खनिज विभाग ने दबिश देकर एक पोकलेन मशीन जब्त कर ली है और इसे बड़ी उपलब्धि बताकर ढोल पीट रहा है। सवाल यह है कि जब 5 साल से खदान बंद थी, तो इतने लंबे समय तक चल रहे अवैध खनन की भनक आखिर विभाग को क्यों नहीं लगी?
दबिश से पहले माफिया को खबर, ऑपरेटर फरार
सूत्रों के मुताबिक जैसे ही टीम रवाना हुई, खनन माफिया तक पहले ही सूचना पहुंच गई। नतीजा यह हुआ कि मौके पर मौजूद पोकलेन ऑपरेटर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। बाद में दूसरी खदान से ऑपरेटर बुलाकर मशीन हटाई गई। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि अवैध खनन नेटवर्क कितना संगठित और रसूखदार
गांव का नाम तक नहीं पता, कार्रवाई का दावा बड़ा!
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि अधिकारियों को उस गांव का नाम तक स्पष्ट जानकारी नहीं थी, जहां कथित कार्रवाई की गई। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जो अफसर क्षेत्र तक नहीं जानते, वे वर्षों से चल रहे खनन माफिया पर कैसे नकेल कसेंगे?
परदे के पीछे कौन?
स्थानीय लोगों में चर्चा है कि बिना संरक्षण के इतने लंबे समय तक बंद खदान में उत्खनन संभव नहीं। आखिर वह कौन चेहरे हैं जो पर्दे के पीछे रहकर इस खेल को चला रहे थे? किसे बचाने के लिए अब सिर्फ मशीन जब्ती की खानापूर्ति की जा रही है?
जनता पूछ रही है जवाब
5 साल तक बंद खदान में खनन कैसे चलता रहा?
पुलिस और खनिज विभाग को जानकारी क्यों नहीं थी?
सिर्फ पोकलेन जब्ती से क्या पूरा नेटवर्क खत्म हो जाएगा?
असली मास्टरमाइंड पर कार्रवाई कब होगी?
अब नजर जांच पर नहीं, नीयत पर है
कटनी की जनता अब यह देख रही है कि यह कार्रवाई सच में माफिया पर चोट है या फिर सिर्फ दिखावे की औपचारिकता। क्योंकि जिले में खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पहले भी सवालों के घेरे में रही है। अगर इस बार भी बड़े नाम बच गए, तो समझिए यह सिर्फ धूल झोंकने की कवायद थी।
कटनी ब्यूरो चीफ सुरेन्द्र कुमार शर्मा
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