
अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨’डिजिटल कबाड़’ से साइबर ठगी का नया जाल, बस्ती पुलिस का बड़ा प्रहार🚨
- डिजिटल कबाड़ से ठगी का साम्राज्य: बस्ती पुलिस ने दबोचा मास्टरमाइंड, 336 मोबाइल और 285 मदरबोर्ड बरामद।
- नया पैंतरा: ब्लॉक हुई IMEI से बचने के लिए पुराने मदरबोर्ड का खेल, बस्ती पुलिस ने बेनकाब की ‘मोडस ऑपेरंडी’।
- मुर्शिदाबाद से बस्ती तक फैला साइबर क्राइम का नेटवर्क; पुलिस की मुस्तैदी से टूटा सप्लाई चेन।
- फेरीवालों के भेष में ठगी का ‘रॉ मटेरियल’ जुटा रहे थे अपराधी, हड़िया चौराहे के पास धरे गए।
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश, 11 अप्रैल 2026
📱तकनीक के दौर में बदलता अपराध का चेहरा
बस्ती।। जैसे-जैसे तकनीक आम आदमी के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन रही है, अपराधी भी खुद को ‘अपग्रेड’ कर रहे हैं। जनपद बस्ती के साइबर क्राइम थाने द्वारा हाल ही में किया गया खुलासा न केवल पुलिस की एक बड़ी कामयाबी है, बल्कि यह देश भर के लिए एक चेतावनी भी है। गांव-गांव से पुराने मोबाइल खरीदकर उनके जरिए साइबर अपराध के साम्राज्य को खाद-पानी देने वाले अंतरराज्यीय गैंग का पकड़ा जाना यह बताता है कि हमारे घरों के कबाड़ में पड़ा एक पुराना फोन भी कितना खतरनाक हो सकता है।
📱घटनाक्रम: हड़िया चौराहे से खुला राज
अपर पुलिस अधीक्षक श्याम कांत और सी.ओ. सदर सत्येंद्र भूषण त्रिपाठी के निर्देशन में साइबर सेल ने एक सटीक सूचना पर कार्रवाई करते हुए हड़िया-मेहदावल मार्ग पर भरवलिया शिव मंदिर के पास से तीन शातिर अभियुक्तों को दबोचा। पकड़े गए अभियुक्तों में बरेली का श्यामपाल कश्यप और पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के मिराजुल रहमान व अतीकुर रहमान शामिल हैं। इनके पास से बरामद 336 मोबाइल फोन और भारी मात्रा में मदरबोर्ड इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यह नेटवर्क कितना विशाल है।
📱ऑपरेशन ‘क्लीन स्वीप’: कैसे बिछाया गया जाल?
अपर पुलिस अधीक्षक श्याम कांत के अनुसार, पिछले कुछ समय से इनपुट मिल रहे थे कि बस्ती और आसपास के जिलों के ग्रामीण इलाकों में कुछ बाहरी लोग संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं। प्रभारी निरीक्षक कुलदीप कुमार त्रिपाठी की टीम ने जब तकनीकी सर्विलांस और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया, तो तार पश्चिम बंगाल और बरेली से जुड़े मिले।
हड़िया-मेहदावल मार्ग पर की गई घेराबंदी में जब अभियुक्तों के थैलों की तलाशी ली गई, तो पुलिस भी दंग रह गई। 156 एंड्रॉइड फोन के साथ-साथ 285 मदरबोर्ड का मिलना यह साबित करता है कि यह गैंग केवल फोन नहीं बेच रहा था, बल्कि अपराधियों को ‘इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स’ की एक ऐसी लाइब्रेरी उपलब्ध करा रहा था जिसे ट्रेस करना नामुमकिन है।
📱अपराधियों का ‘नया मोडस ऑपेरंडी’: क्यों खरीदे जा रहे थे पुराने फोन?
इस गिरफ्तारी ने साइबर अपराधियों की उस नई चाल को बेनकाब कर दिया है, जिससे वे कानून की आंखों में धूल झोंक रहे थे। समीक्षात्मक दृष्टि से देखें तो इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
- IMEI की री-साइक्लिंग: जब पुलिस किसी साइबर ठगी की जांच करती है, तो वह अपराधी के मोबाइल नंबर और IMEI (International Mobile Equipment Identity) को ब्लॉक कर देती है। इससे बचने के लिए अपराधी पुराने वैध फोन के मदरबोर्ड का इस्तेमाल कर रहे थे, जिनका रिकॉर्ड साफ होता है।
- गांवों को निशाना बनाना: गांव के भोले-भाले लोग चंद रुपयों के लालच में या बर्तन/सामान के बदले पुराने फोन दे देते हैं। उन्हें यह अंदाजा भी नहीं होता कि उनके पुराने फोन का इस्तेमाल देश के किसी दूसरे कोने में बड़ी वित्तीय ठगी के लिए किया जाएगा।
- कोलकाता कनेक्शन: पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये फोन कोलकाता भेजे जाते थे, जो अब साइबर अपराधियों के लिए एक बड़ा ‘प्रोसेसिंग हब’ बनता जा रहा है।
📱पुलिस की तत्परता और बरामदगी
प्रभारी निरीक्षक कुलदीप कुमार त्रिपाठी और उनकी टीम ने जिस पेशेवर तरीके से 285 मदरबोर्ड और डीसी मशीन जैसे तकनीकी उपकरण बरामद किए हैं, वह सराहनीय है। यह बरामदगी दर्शाती है कि अपराधी केवल फोन नहीं बेच रहे थे, बल्कि वे पूरी तरह से एक ‘मोबाइल रिफर्बिशिंग लैब’ चला रहे थे ताकि हार्डवेयर स्तर पर बदलाव किए जा सकें।
📱सतर्कता ही बचाव: जनता के लिए संदेश
इस ब्यूरो रिपोर्ट का सबसे अहम पहलू जनता की जागरूकता है। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि:
- पुराना फोन कभी भी अनजान फेरीवालों को न बेचें।
- यदि फोन बेचना ही है, तो उसका डेटा पूरी तरह ‘फैक्ट्री रिसेट’ करें और किसी विश्वसनीय प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें।
- अपना पुराना फोन देने से पहले उसका बिल या आईडी प्रूफ जरूर लें, अन्यथा भविष्य में वह फोन किसी अपराध में इस्तेमाल हुआ तो पुलिस की जांच की आंच आप तक पहुँच सकती है।
बस्ती पुलिस द्वारा किया गया यह खुलासा साइबर सुरक्षा की दिशा में एक मील का पत्थर है। हालांकि, यह केवल एक गैंग की गिरफ्तारी है; असली चुनौती उस पूरे ईकोसिस्टम को ध्वस्त करने की है जो ‘वेस्ट मोबाइल’ को ‘वेपन’ में बदल रहा है। इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस अब अपराधियों से दो कदम आगे की सोच रख रही है।


















