
अजीत मिश्रा (खोजी)
🏫नौनिहालों की जिंदगी से ‘खूनी’ खिलवाड़: निर्माणाधीन मलबे के बीच ‘सनराइज’ स्कूल मना रहा जश्न🏫
🚨बस्ती में आपदा को दावत देता सनराइज स्कूल: निर्माणाधीन भवन में वार्षिकोत्सव, सुरक्षा मानकों की उड़ी धज्जियाँ🚨
- सनराइज स्कूल का ‘काला’ कारनामा: बिना नक्शा पास कराए खड़ा किया अवैध ढांचा, मलबे के बीच चल रही क्लासें।
- BDA और शिक्षा विभाग की ‘मौन’ सहमति: सनराइज स्कूल की मनमानी पर कब गिरेगी गाज?
- हादसे के इंतजार में बस्ती का शिक्षा विभाग! मानक विहीन स्कूल बना रहे मासूमों को निशाना।
- क्या किसी बड़े कांड का इंतजार कर रहा प्रशासन? सनराइज स्कूल में सुरक्षा मानकों की उड़ी धज्जियाँ।
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
बस्ती। जनपद के स्टेशन रोड स्थित सनराइज स्कूल के प्रबंधन का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसे सुनकर किसी भी अभिभावक की रूह कांप जाए। जहाँ एक ओर शिक्षा के मंदिर में बच्चों का भविष्य संवारा जाता है, वहीं सनराइज स्कूल प्रबंधन ने चंद रुपयों और दिखावे के लिए सैकड़ों मासूमों की जान दांव पर लगा दी। गुरुवार को विद्यालय परिसर में जिस जगह ‘वार्षिकोत्सव’ का शोर था, असल में वह स्थान मौत के जाल से कम नहीं था।
खतरे के साये में ‘जादू’ का खेल
हैरानी की बात यह है कि स्कूल के अंदर और बाहर अभी भी भारी निर्माण कार्य चल रहा है। चारों तरफ सरिया, सीमेंट और ईंटों का अंबार है। इसी निर्माणाधीन और असुरक्षित भवन में गुरुवार को जादू का कार्यक्रम आयोजित किया गया। सैकड़ों बच्चे उस मलबे और असुरक्षित ढांचे के बीच बैठे रहे, जहाँ कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता था। बड़ा सवाल यह है कि यदि इस भीड़भाड़ के बीच कोई दीवार ढह जाती या सरिया किसी बच्चे को लग जाता, तो इस ‘खूनी खेल’ का जिम्मेदार कौन होता?
बिना नक्शा पास कराए खड़ा कर दिया ‘मौत का ढांचा’
विश्वस्त सूत्रों की मानें तो इस विद्यालय भवन का निर्माण बस्ती विकास प्राधिकरण (BDA) से बिना नक्शा पास कराए ही धड़ल्ले से किया जा रहा है। मानकों को ताक पर रखकर अवैध रूप से खड़ी की जा रही इस इमारत में रोजाना सैकड़ों बच्चे चहल-कदमी करते हैं। प्रबंधन की तानाशाही और लालच का आलम यह है कि निर्माण कार्य के बीच ही स्कूल का संचालन भी किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
शिक्षा विभाग की ‘मौन’ सहमति पर सवाल
बस्ती जनपद में मानक विहीन स्कूलों की बाढ़ सी आ गई है। चर्चा है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों की शह पर ही ऐसे स्कूल फल-फूल रहे हैं। आखिर जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद क्यों सो रहे हैं? क्या विभाग को किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार है? सनराइज स्कूल की इस मनमानी ने पूरे विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
निर्माणाधीन भवन में बच्चों को बिठाना और स्कूल संचालित करना कानूनन अपराध है। यदि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग ने इस मामले का तत्काल संज्ञान नहीं लिया, तो बस्ती जनपद में एक बड़े हादसे की पटकथा लिखी जा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी इस स्कूल पर ताला लटकाते हैं या फिर नौनिहालों की जान से यह खिलवाड़ यूँ ही जारी रहेगा।
प्रमुख बिंदु जो लेख को धार देते हैं:
🔥सवाल: अगर कोई बड़ी घटना घटती तो कौन होता जिम्मेदार?
🔥आरोप: BDA के बिना नक्शा पास कराए अवैध निर्माण का दावा।
🎯चेतावनी: अधिकारियों की अनदेखी बन सकती है बड़े हादसे का कारण।




















