

🔴 अंकिता भंडारी हत्याकांड पर बड़ा हमला: सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता का देहरादून से सरकार पर सीधा सवाल, “VIP का नाम सामने, फिर भी गिरफ्तारी क्यों नहीं?”
देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर देहरादून में आयोजित एक प्रेस वार्ता में उच्चतम न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता ने राज्य सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मामला अब केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि VIP संरक्षण, निष्पक्ष जांच और न्याय व्यवस्था की साख से जुड़ गया है।
प्रेस वार्ता के दौरान अधिवक्ता ने छह अहम बिंदुओं पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया—
🔹 1. VIP का नाम सामने, फिर गिरफ्तारी क्यों नहीं?
अधिवक्ता ने कहा कि जब किसी गंभीर आपराधिक मामले में किसी व्यक्ति का नाम सामने आता है, तो कानून के तहत पहले गिरफ्तारी और फिर जांच होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि उर्मिला सनावर द्वारा जिस VIP का नाम सार्वजनिक किया गया, उसकी अब तक गिरफ्तारी न होना सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है।
“क्या कानून VIP के लिए अलग है?”—यह सीधा सवाल उन्होंने मंच से उठाया।
🔹 2. सरकार जानबूझकर CBI जांच से बच रही
उन्होंने आरोप लगाया कि VIP एंगल सामने आने के बावजूद राज्य सरकार का CBI जांच से बचना संदेह पैदा करता है।
अधिवक्ता के अनुसार, यदि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी गई, तो कई बड़े और प्रभावशाली नाम सामने आ सकते हैं, इसी डर से सरकार पीछे हट रही है।
🔹 3. उर्मिला सनावर की सुरक्षा तत्काल बढ़ाई जाए
VIP का नाम उजागर करने के बाद उर्मिला सनावर का सोशल मीडिया अकाउंट हैक होना गंभीर खतरे का संकेत है।
अधिवक्ता ने आशंका जताई कि उर्मिला की जान को खतरा हो सकता है, इसलिए सरकार को तुरंत उनकी सुरक्षा बढ़ानी चाहिए।
उन्होंने कहा—“सच बोलने वालों को डराया नहीं, बचाया जाना चाहिए।”
🔹 4. अंकिता को न्याय दिलाने के लिए सड़क से अदालत तक लड़ाई
अधिवक्ता ने कहा कि उन्नाव रेप पीड़िता के मामले में उनकी संस्था ने सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक संघर्ष किया था और न्याय दिलाया था।
अब वही संस्था अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ मजबूती से खड़ी है।
“यह लड़ाई तब तक चलेगी, जब तक अंकिता को पूरा न्याय नहीं मिल जाता।”
🔹 5. उन्नाव केस की तरह अंकिता केस में भी आंदोलन
उन्होंने याद दिलाया कि कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत मिलने के बाद उन्होंने विरोध प्रदर्शन किए थे, जिसके बाद जमानत रद्द हुई।
उसी अनुभव के आधार पर उन्होंने कहा कि अंकिता केस में भी सड़क से लेकर अदालत तक संघर्ष होगा, चाहे कितना ही दबाव क्यों न आए।
🔹 6. अंकिता के माता-पिता से मुलाकात, भावुक अपील
अधिवक्ता ने बताया कि उन्होंने अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की है।
परिवार मानसिक रूप से टूट चुका है, लेकिन उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि
“यह लड़ाई सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है।”
⚖️ मुख्य मांग
प्रेस वार्ता के अंत में अधिवक्ता ने स्पष्ट मांग रखी कि—
👉 अंकिता भंडारी हत्याकांड की CBI जांच एक निश्चित समय-सीमा में हो
👉 यह जांच हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अब भी आंखें मूंदी रखीं, तो यह मामला देशव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है।
रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज़, सहारनपुर
📞 संपर्क: 8217554083











