
आपको बता दें कि शहर के माधवनगर थाना क्षेत्र में स्थित प्राकृतिक धरोहर ‘लाल पहाड़ी’ इन दिनों अवैध खनन के कारण तेजी से खत्म होती जा रही है। करीब 300 एकड़ में फैली यह पहाड़ी कभी बॉक्साइट और लेटेराइट जैसे खनिजों से समृद्ध मानी जाती थी, लेकिन अब खनिज माफियाओं की अंधाधुंध खुदाई ने इसे विनाश की कगार पर ला खड़ा किया है।सूत्रों के अनुसार झिझंरी, बरगवां और एलआईसी कार्यालय के आसपास दिन-रात भारी मशीनों से अवैध उत्खनन किया जा रहा है। शहर के बीचों-बीच चल रहे इस अवैध खनन के बावजूद खनिज विभाग की निष्क्रियता कई सवाल खड़े कर रही है।बताया जाता है कि खनन कार्य में न तो वैध माइनिंग प्लान का पालन किया जा रहा है और न ही पर्यावरणीय अनुमति (एनओसी) ली गई है। नियमों की खुलेआम अनदेखी कर खनिज माफिया शासन को करोड़ों रुपये की रॉयल्टी का नुकसान पहुंचा रहे हैं।इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो क्षेत्र की हरियाली और भूजल स्तर पर गंभीर असर पड़ेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अनियंत्रित खनन से पर्यावरण संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे भविष्य में जल संकट और भूमि क्षरण जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।प्रशासन से उठते सवाल:शहर के बीचों-बीच इतने बड़े स्तर पर अवैध खनन किसके संरक्षण में चल रहा है?क्या खनिज विभाग इस पूरे मामले में मूकदर्शक बना हुआ है?और क्या प्रशासन इस प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई करेगा?फिलहाल, लाल पहाड़ी का भविष्य अधर में है और जिम्मेदार विभागों की चुप्पी स्थिति को और गंभीर बना रही है। जिससे साफ जाहिर होता है कि य




