
कड़ाके की ठंड में इंसानियत की गर्माहट, सुकरौली में अनमोल जायसवाल का कंबल वितरण अभियान बना मिसाल
सुकरौली (कुशीनगर)। पूरा पूर्वांचल इन दिनों भीषण ठंड की गिरफ्त में है। आसमान से गिरती सर्दी, तेज पछुआ हवाएं और सुबह-शाम छाया घना कोहरा जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर चुका है। तापमान लगातार नीचे जा रहा है, जिससे गलन बढ़ती जा रही है। ऐसे में जहां सक्षम और मध्यम वर्ग के लोग किसी तरह हीटर, रजाई और गर्म कपड़ों के सहारे ठंड से बचाव कर रहे हैं, वहीं गरीब और असहाय लोगों के लिए यह मौसम किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है। जिनके पास न कंबल है, न गर्म कपड़े और न ही ठंड से बचाव का कोई पुख्ता इंतजाम, उनके लिए हर गुजरती रात किसी चुनौती की तरह है।

कुशीनगर जिले में इस कड़ाके की ठंड को देखते हुए कई समाजसेवी आगे आए हैं और जरूरतमंदों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। जिले के विभिन्न इलाकों में कंबल वितरण, अलाव जलाने और राहत कार्यों का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में नगर पंचायत सुकरौली में भी एक सराहनीय और मानवीय पहल देखने को मिल रही है, जिसने लोगों का दिल जीत लिया है।

नगर पंचायत सुकरौली निवासी अनमोल जायसवाल पुत्र दीपक जायसवाल द्वारा चलाया जा रहा कंबल वितरण अभियान पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अनमोल जायसवाल अपनी टीम के साथ देर रात नगर के विभिन्न मोहल्लों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर पहुंचते हैं। वे पहले जरूरतमंद परिवारों की पहचान करते हैं, उनका हालचाल पूछते हैं और फिर वास्तविक जरूरतमंदों को कंबल प्रदान करते हैं। यह कार्य सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ किया जा रहा है।

अनमोल जायसवाल का कहना है कि इस साल ठंड सामान्य से कहीं अधिक पड़ रही है। कई ऐसे परिवार हैं, जिनके पास ठंड से बचने का कोई साधन नहीं है। मजबूरी में लोग पूरी रात ठिठुरते हुए गुजार रहे हैं। यही सोचकर उन्होंने यह संकल्प लिया कि जब तक ठंड का प्रकोप रहेगा, तब तक जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाने का प्रयास जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि पहले ही दिन लगभग 50 गरीब और असहाय लोगों को कंबल वितरित किए गए हैं और आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ाई जाएगी। इस मानवीय पहल से जरूरतमंदों के चेहरों पर राहत और संतोष की मुस्कान साफ दिखाई दे रही है। क्षेत्र के लोग भी इस प्रयास की खुले दिल से सराहना कर रहे हैं। सच मायनों में, कड़ाके की ठंड में यह अभियान इंसानियत की गर्माहट बनकर उभरा है।







