
सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664* कर्रापुर क्षेत्र में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार कर्रापुर स्थित शराब दुकान का टेंडर न होने के बावजूद इसे नियमों के विरुद्ध सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी लगी होने के बावजूद निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित किया जा रहा है। नियमानुसार, जिस दुकान का टेंडर नहीं होता, उसका संचालन आबकारी विभाग के सरकारी कर्मचारियों द्वारा किया जाना चाहिए, लेकिन यहाँ स्थिति इसके ठीक उलट है।
क्षेत्र से मिल रही शिकायतों के मुताबिक, दुकान पर प्रिंट रेट से अधिक वसूली की जा रही है। ₹108 एमआरपी वाले लाल शराब के पौआ को खुलेआम ₹120 में बेचा जा रहा है। उपभोक्ता इस अवैध वसूली से परेशान हैं लेकिन दुकान पर मौजूद निजी कारिंदों के आगे उनकी सुनवाई नहीं हो रही है
नियमों के मुताबिक, 1 अप्रैल से लागू नई आबकारी नीति के तहत दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया ई-टेंडर के माध्यम से होनी है। ऐसे में कर्रापुर की दुकान का निजी हाथों में होना विभाग की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब टेंडर प्रक्रिया लंबित है, तो निजी व्यक्ति कैसे दुकान के अंदर बैठकर शराब बेच सकते हैं


