
अजीत मिश्रा (खोजी)
गणेशपुर: ‘सूदखोर’ कल्लू सोनार के जाल में फंसा गरीब, 30 हजार के बदले मांगे सवा लाख!
- गरीबों की मजबूरी, सूदखोर की तिजोरी: गणेशपुर में जारी है कल्लू सोनार की ‘गुंडा टैक्स’ जैसी वसूली।
- बस्ती पुलिस ध्यान दे! गणेशपुर में कानून को ठेंगा दिखा रहा सूदखोर कल्लू सोनार।
- क्या प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा है अवैध ब्याज का काला धंधा? पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार।
- सिकटा का ‘सूदखोर’ और गणेशपुर की ‘दहशत’: आखिर कब थमेगा कल्लू सोनार का कहर?
- ब्याज माफिया कल्लू सोनार का शिकार बना मनोज, न्याय के लिए दर-दर भटक रहा पीड़ित।
- 30% ब्याज की दरिंदगी: कल्लू सोनार के चंगुल में फंसा गणेशपुर का मजबूर तबका।
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल | 12 अप्रैल, 2026
बस्ती।। जनपद के नगर पंचायत गणेशपुर से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक स्वर्ण व्यवसायी की ‘रक्तबीज’ जैसी सूदखोरी ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। सिकटा का निवासी और गणेशपुर में सोने की दुकान चलाने वाला कल्लू सोनार अब गरीबों के लिए साक्षात काल बन चुका है। अपनी दुकान की आड़ में वह ब्याज का ऐसा काला धंधा चला रहा है, जिसने कई परिवारों की कमर तोड़ दी है।
मजबूरी का सौदा: 30% तक की अवैध वसूली
ताजा मामला मनोज कुमार नामक व्यक्ति का है, जिसने अपनी पारिवारिक मजबूरी और डिलीवरी के खर्चों के लिए कल्लू सोनार से मदद की गुहार लगाई थी। पीड़ित ने बताया कि उसने अपनी गृहस्थी के गहने—पाउजेब, पायल और कान के झाले—गिरवी रखकर मात्र 30,000 रुपये उधार लिए थे।
लेकिन, कल्लू सोनार की दरिंदगी का आलम यह है कि महज 8-9 महीनों के भीतर उस 30 हजार की राशि को ब्याज के चक्रव्यूह में फंसाकर 1,20,000 रुपये बना दिया गया। 20 से 30 प्रतिशत की दर से वसूला जा रहा यह ब्याज किसी भी संवैधानिक कानून की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है।
दहशत का पर्याय बना ‘कल्लू सोनार’
ग्रामीणों का आरोप है कि कल्लू सोनार सिर्फ एक दुकानदार नहीं, बल्कि एक पेशेवर सूदखोर है जो लोगों की लाचारी को अपनी तिजोरी भरने का जरिया बनाता है। गिरवी रखे सामान को हड़पना और ब्याज पर ब्याज लगाकर मूलधन से चार गुना वसूली करना उसकी कार्यशैली बन चुकी है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल?
आखिर कब तक गणेशपुर के गरीब इस आर्थिक शोषण की बलि चढ़ते रहेंगे? क्या बस्ती पुलिस और स्थानीय प्रशासन इस अवैध ब्याज माफिया के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई करेगा? पीड़ित मनोज कुमार ने वीडियो के जरिए अपनी व्यथा सुनाई है और अब सबकी नजरें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं।
हमारी मांग:
- कल्लू सोनार के ब्याज के कारोबार की गहन जांच हो।
- पीड़ितों के गिरवी रखे जेवर तुरंत वापस कराए जाएं।
- अवैध बैंकिंग और सूदखोरी अधिनियम के तहत सख्त मुकदमा दर्ज हो।
1. व्यवस्था पर प्रहार :
“यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उस सड़ी-गली व्यवस्था पर तमाचा है जहाँ कानून की नाक के नीचे कल्लू सोनार जैसे ‘आर्थिक नरभक्षी’ पल रहे हैं। जब गरीब अपनी गाढ़ी कमाई का हिस्सा इन दरिंदों के हवाले कर देता है, तब प्रशासन की खामोशी मिलीभगत का अहसास कराती है। क्या खाकी का खौफ खत्म हो चुका है, या फिर इन सूदखोरों की पहुँच सत्ता के गलियारों तक है?”
2. सूदखोर की मानसिकता पर चोट:
“कल्लू सोनार जैसे लोग समाज के घुन हैं, जो मजहब और मानवता की नहीं, सिर्फ ‘फीसदी’ की भाषा समझते हैं। गिरवी रखे जेवरों पर कुंडली मारकर बैठना और फिर उसी मजबूर इंसान को सरेआम बेइज्जत करना, यह इनकी पुरानी कार्यशैली है। 30% ब्याज कोई व्यापार नहीं, बल्कि गरीब का गला रेतने जैसा है।”
3. जनता के लिए आह्वान (अपील):
“आज मनोज कुमार का घर उजड़ रहा है, कल आपकी बारी हो सकती है। इन ‘सफेदपोश डकैतों’ के खिलाफ जब तक समूचा समाज उठ खड़ा नहीं होगा, तब तक गणेशपुर की गलियों में ऐसी चीखें गूंजती रहेंगी। डरिए मत, आवाज उठाइए!”
”गरीब की हाय से बना ये महल ज्यादा दिन नहीं टिकेगा। अब वक्त आ गया है कि प्रशासन इस आतंक का अंत करे।”
“अब कागजी कार्रवाई का वक्त बीत चुका है। बस्ती मंडल के अधिकारियों को तय करना होगा कि वे कानून के रक्षक हैं या इन सूदखोरों के मूक दर्शक। कल्लू सोनार जैसे लोगों को जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए, न कि गणेशपुर के चौराहे पर सीना तानकर घूमना चाहिए। इंसाफ में देरी, अन्याय को बढ़ावा है!”





















