
सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664* शहर में अवैध गतिविधियों और टैक्स चोरी पर अंकुश लगाने के लिए गठित नगर निगम का ‘उड़नदस्ता दल’ ने जब गुजराती नमकीन फैक्ट्री पर कार्यवाहियां की तो जमकर अनियमित सामने आई। गुरु गोविंद सिंह वार्ड स्थित ‘गुजराती नमकीन’ फैक्ट्री में भारी अनियमितताएं उजागर होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई और आज भी नमकीन फैक्ट्री का संचालन किया जा रहा है। नागरिकों का आरोप है कि नियमों की खुलेआम अनदेखी के बावजूद फैक्ट्री संचालक को संरक्षण दिया जा रहा है।
नगर निगम के सहायक आयुक्त एवं उड़नदस्ता प्रभारी आनंद मंगल गुरु के निरीक्षण में फैक्ट्री में कई अनियमितताएं सामने आईं: जिसने ट्रेड लाइसेंस का अभाव,कारखाना संचालन की अनुमति नहीं,सुरक्षा मानकों की अनदेखी इसके बावजूद फैक्ट्री पर कोई ठोस प्रतिबंधात्मक कार्रवाई नहीं की गई। फैक्ट्री संचालन में नगर निगम अधिनियम 1956 की प्रमुख धाराओं का उल्लंघन पाया गया: जिसके अनुसार धारा 246: खतरनाक व असुरक्षित निर्माण पर कार्रवाई का प्रावधान, फिर भी सीलिंग नहीं। ट्यूबवेल के पानी की जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं।स्वच्छता और हाइजीन के नियमों का अभाव,खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी,यह सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य के लिए खतरा है।इस पूरे मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग की निष्क्रियता भी सामने आ रही है।जानकारी के अनुसार, सागर शहर में आधा दर्जन से अधिक नमकीन फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं, लेकिन: गुणवत्ता की नियमित जांच नहीं की जा रही।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय-समय पर जांच होती, तो इस प्रकार की लापरवाही सामने आने से पहले ही रोकी जा सकती थी। जांच में यह भी सामने आया कि फैक्ट्री का संपत्तिकर वास्तविक क्षेत्रफल की तुलना में कम निर्धारित किया गया है, जिससे नगर निगम को आर्थिक नुकसान हो रहा है। नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री द्वारा संबंधित कर-संग्राहक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।क्षेत्रीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि:फैक्ट्री को तत्काल उच्च स्तरीय जांच कि जाए,भारी जुर्माना वसूला जाए, खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच हो।पूरा मामला यह दर्शाता है कि यदि जिम्मेदार विभाग समय रहते सक्रिय नहीं हुए, तो यह लापरवाही शहरवासियों के स्वास्थ्य और प्रशासन की विश्वसनीयता दोनों के लिए खतरा बन सकती है,








