

बलौदाबाजार।
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा थाना क्षेत्र में एक भयावह दृश्य देखने को मिला। खार के नाले में मवेशियों को काटकर फेंका जा रहा है, जिसे गिद्ध, कौवे और कुत्ते नोच-नोच कर खा रहे हैं। यह दृश्य न केवल संवेदनशील है, बल्कि यह स्पष्ट संदेश दे रहा है कि गोवंश पर अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहा है।
जिले में कई संगठन जैसे बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और अन्य सामाजिक संस्थाएं समय-समय पर गौ रक्षण के मुद्दों को उठाते रहे हैं और कुछ मामलों में ठोस कार्यवाही भी हुई है। लेकिन इसके बावजूद, मवेशियों की हत्या और गौ माता पर अत्याचार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
विश्रामपुर, दामाखेड़ा और किरवई जैसे क्षेत्रों में पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं। आज चौरेंगा के खार में देखा गया कि शराब पीकर कुछ लोग मवेशियों पर अत्याचार कर रहे हैं। मवेशियों को कपड़ों में बांधकर नोचा जा रहा है, बड़े हथियारों से काटा जा रहा है—चमड़ा, सिर, पैर, धड़ और अन्य अंग बिखरे पड़े हैं। यह दृश्य खून से लथपथ धरती माता की पीड़ा को प्रत्यक्ष रूप में सामने ला रहा है।
थाना प्रभारी लखेश केंवट ने बताया कि हाल ही में ऐसी घटनाओं के कई मामले एफआईआर दर्ज किए गए हैं और आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने प्रशासन से इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित संज्ञान लेने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की।
गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग देशभर में साधु-संतों के मुख से लगातार उठ रही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर कब तक मवेशियों पर अत्याचार की यह घृणित प्रक्रिया जारी रहेगी और प्रशासन इस पर कब तक मौन रहेगा।
खबर के अगले अंक में इस घटना के और पहलुओं के साथ विस्तृत प्रकाशन होगा।




