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चखना सेंटर की आड़ में धड़ल्ले से परोसी जा रही शराब: बस्ती जिले में कानून की खुली धज्जियां

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। चखना सेंटर की आड़ में धड़ल्ले से परोसी जा रही शराब: बस्ती जिले में कानून की खुली धज्जियां।।

बस्ती उत्तर प्रदेश

 जिले में सरकारी देशी और अंग्रेजी शराब दुकानों के इर्द-गिर्द अवैध चखना सेंटरों का जाल बिछा हुआ है। इन सेंटरों की आड़ में शराब पीने-पिलाने का खेल जोरों पर चल रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद आबकारी विभाग और पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। नियमों की अनदेखी से चखना संचालकों के हौसले बुलंद हैं, जिससे व्यस्त सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। आसपास धार्मिक स्थल, स्कूल और महिलाओं-बच्चों का आवागमन होने से माहौल लगातार खराब हो रहा है।शराब दुकानों के ठीक बगल में चल रहे इन चखना सेंटरों में शराबी ठेके से बोतल लेकर आते हैं और वहीं जमकर चखना के साथ शराब गटकते हैं। इससे सड़क पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगता है, जिससे राहगीरों, खासकर महिलाओं और स्कूली बच्चों का गुजरना मुश्किल हो गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन अवैध गतिविधियों से गुंडागर्दी और शराबखोरी पर लगाम लगनी चाहिए, वरना कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।विभागीय अफसरों की खुली अनदेखीनियमों के मुताबिक, किसी भी शराब दुकान के पास चखना सेंटर या अहाता लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। शासन ने इस पर सख्त पाबंदी लगा रखी है। बावजूद इसके, इन दुकानों में पानी पाउच, डिस्पोजल गिलास, सोडा, चना, मुरमुरा, चाय-नाश्ता बेचने के साथ-साथ शराबियों को बैठकर शराब परोसने की सुविधा दी जा रही है। विभागीय अधिकारियों को इसकी पूरी जानकारी है, लेकिन वे कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते हैं। आबकारी टीम रोज शराब दुकानों की जांच करने आती है, मगर चखना सेंटरों पर आंखें मूंद लेती है।स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस अवैध धंधे में विभागीय मिलीभगत साफ नजर आती है। राजनीतिक संरक्षण और रसूखदार लोगों का हाथ होने से अधिकारी सब कुछ देखकर भी अनजान बने रहते हैं। यदि यही स्थिति रही तो जिले में कानून-व्यवस्था के लिए बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।लंबे समय से चल रहा अवैध खेलयह खेल महीनों से नहीं, बल्कि वर्षों से चल रहा है। शराब दुकानों के मैनेजर और गुर्गों के जरिए अवैध शराब की सप्लाई गांव-गांव तक पहुंचाई जा रही है। रात के अंधेरे में खुलेआम शराब की डिलीवरी होती है, जो स्थानीय ठेकों से ही निकलती है। कोचियों और छोटे विक्रेताओं तक शराब पहुंचाने का नेटवर्क सक्रिय है। शासन की सख्त हिदायतों के बावजूद अवैध शराब बिक्री पर कोई अंकुश नहीं लग पा रहा।निवासियों की मांग है कि आबकारी और पुलिस विभाग संयुक्त कार्रवाई करें। इन चखना सेंटरों पर तत्काल बुलडोजर चलाया जाए और दोषी अधिकारियों पर भी सख्त एक्शन लिया जाए। अन्यथा, दुर्घटनाएं और सामाजिक अशांति बढ़ेंगी।

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