
अजीत मिश्रा (खोजी)
🗓️वित्तीय वर्ष का अंतिम दिन: कोषागार में बरसे करोड़ों, विकास विभाग रहा सबसे आगे🗓️
💰छुट्टी के दिन भी ‘फुल ड्यूटी’: ट्रेजरी में बरसे करोड़ों, विकास और पुलिस विभाग रहे सबसे आगे
🪙बस्ती ट्रेजरी की बड़ी कार्रवाई: अंतिम दिन 78 करोड़ का भुगतान, सरेंडर होने वाले बजट में आई कमी
🪙विकास की रफ्तार: 24 करोड़ के बिलों के साथ ‘डेवलपमेंट डिपार्टमेंट’ अव्वल।
🎯पुलिस और स्वास्थ्य विभाग का बड़ा दांव, करोड़ों के भुगतान से थमा वित्तीय वर्ष।
बस्ती मंडल उत्तर प्रदेश।
बस्ती। वित्तीय वर्ष 2024-25 के समापन पर जिले के सरकारी महकमों में बजट खपाने की जबरदस्त होड़ देखने को मिली। मार्च क्लोजिंग के अंतिम दिन जिले के विभिन्न विभागों ने कुल 78 करोड़ रुपये के बिल भुगतान के लिए कोषागार (ट्रेजरी) में प्रस्तुत किए। दिलचस्प बात यह रही कि महावीर जयंती का अवकाश होने के बावजूद शासन के निर्देश पर बैंक और ट्रेजरी कार्यालय देर रात तक खुले रहे, ताकि विकास कार्यों का पैसा लैप्स न हो जाए।
🎇देर रात तक चलता रहा फाइलों का दौर
मंगलवार को सुबह 10 बजे से ही ट्रेजरी कार्यालय में गहमागहमी शुरू हो गई थी। विभिन्न विभागों के बाबू और अधिकारी फाइलों के पुलिंदे लेकर पहुंचे। मुख्य कोषाधिकारी अशोक प्रजापति ने बताया कि शाम 6:30 बजे तक बिल स्वीकार किए गए, जिसके बाद देर रात तक उनके मिलान और डिजिटल सिग्नेचर के जरिए भुगतान की प्रक्रिया चलती रही।
🎇विकास विभाग ने मारी बाजी
इस वर्ष बजट खर्च करने के मामले में विकास विभाग सबसे शीर्ष पर रहा, जिसने अकेले 24 करोड़ रुपये के बिल भुगतान के लिए भेजे। इसके ठीक बाद पुलिस विभाग रहा, जिसने करीब 23 करोड़ रुपये का बजट क्लीयर कराया। स्वास्थ्य और लोक निर्माण विभाग भी करोड़ों के भुगतान के साथ सक्रिय दिखे।
💫प्रमुख विभागों का खर्च एक नजर में:
👉विकास विभाग: 24 करोड़
🔥पुलिस विभाग: 23 करोड़
👉स्वास्थ्य विभाग: 11.50 करोड़
👉लोक निर्माण विभाग: 5.50 करोड़
👉वन विभाग: 5 करोड़
🔥सिंचाई विभाग: 4 करोड़
💫बजट सरेंडर की संख्या में आई कमी
प्रशासनिक सतर्कता का ही परिणाम रहा कि इस बार बजट वापस (सरेंडर) होने की दर पिछले वर्षों की तुलना में कम रही। केवल आठ विभागों ने करीब 8 करोड़ रुपये का बजट सरेंडर किया है। जिलाधिकारी के निर्देशन में चली इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जिले के विकास के लिए आवंटित धनराशि का अधिकतम उपयोग जनहित के कार्यों में हो सके।
💫रजिस्ट्री कार्यालय में भी रही धूम
वित्तीय वर्ष का अंतिम दिन होने के कारण केवल ट्रेजरी ही नहीं, बल्कि निबंधन (रजिस्ट्री) कार्यालय में भी भारी भीड़ देखी गई। शाम पांच बजे तक जमीनों की रजिस्ट्री का काम चलता रहा, जिससे सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व प्राप्त हुआ।
✍️समीक्षात्मक रिपोर्ट: मार्च क्लोजिंग और वित्तीय प्रबंधन
मुख्य आकर्षण (Key Highlights)
👉कुल लेनदेन: वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन ट्रेजरी में कुल 78 करोड़ रुपये के बिल पहुंचे।
👉सर्वाधिक खर्च: विकास विभाग (Development Department) सबसे आगे रहा, जिसने अकेले 24 करोड़ रुपये का बिल भेजा।
👉समय सीमा: बिल स्वीकार करने का समय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक निर्धारित था। देर रात तक बिल पास करने की प्रक्रिया चलती रही।
🔥छुट्टी का प्रभाव: महावीर जयंती के कारण अवकाश होने के बावजूद बैंक और ट्रेजरी कार्यालय पूरी तरह खुले रहे ताकि वित्तीय कार्य बाधित न हों।
✍️महत्वपूर्ण अवलोकन (Observations)
👉बजट सरेंडर में कमी: रिपोर्ट के अनुसार, इस बार बजट ‘सरेंडर’ (वापस करने) की संख्या कम रही। आठ विभागों ने करीब 8 करोड़ का बजट सरेंडर किया है, जिसका अर्थ है कि अधिकांश विभागों ने आवंटित धन का उपयोग कर लिया है।
🤙प्रशासनिक सक्रियता: मुख्य कोषाधिकारी अशोक प्रजापति और डीएम प्रियंका निरंजन के नेतृत्व में ट्रेजरी कर्मियों ने देर रात तक काम किया। यह प्रशासनिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है ताकि विकास कार्य के लिए आवंटित धन का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके।
🔥अंतिम समय की जल्दबाजी: रिपोर्ट से स्पष्ट है कि कई विभाग वर्ष के अंत में बजट खपाने की जुगत में रहते हैं। यदि यह बजट 31 मार्च तक खर्च नहीं होता, तो लैप्स (निरस्त) हो जाता और अगले वर्ष के बजट में जुड़ जाता।
निष्कर्ष: मार्च क्लोजिंग की यह भागदौड़ सरकारी कार्यप्रणाली के उस पहलू को दर्शाती है, जहाँ अंतिम क्षणों में लक्ष्य प्राप्ति का दबाव होता है। हालांकि, 78 करोड़ का भुगतान जिले की आर्थिक गति को नई ऊर्जा देगा।यह रिपोर्ट सरकारी मशीनरी की उस कार्यप्रणाली को उजागर करती है जहाँ वित्तीय वर्ष के अंत में धन खर्च करने का भारी दबाव होता है। हालांकि, 78 करोड़ के बिल पास होना आर्थिक गतिविधियों की दृष्टि से सकारात्मक है, लेकिन अंतिम क्षणों में इतनी बड़ी राशि का लेन-देन वित्तीय योजना और समय प्रबंधन पर सवाल भी खड़ा करता है।
✍️विशेष नोट: इस प्रक्रिया में रजिस्ट्री कार्यालय भी सक्रिय रहा, जहाँ शाम 5 बजे तक सामान्य दिनों की तुलना में अधिक चहल-पहल देखी गई।






















