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बस्ती: गौर ब्लॉक में ‘अधिकारीशाही’ हावी, DM का आदेश रद्दी की टोकरी में!

बैदोलिया कांड: 24 दिन, 10 चक्कर और शून्य नतीजा—विकास पर सचिव का 'ताला'

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। कलेक्टर का आदेश बना ‘कागज का टुकड़ा’, गौर के बैदोलिया में विकास को लगा ‘अधिकारीशाही’ का ग्रहण ।।

⭐सिस्टम की सुस्ती: कागजों में गठित हुई समिति, पर ‘डिजिटल चाबी’ (DSC) दबाए बैठे हैं सचिव!

⭐DM के आदेश की उड़ी धज्जियां, बैदोलिया ग्राम पंचायत में विकास कार्य ‘कोमा’ में।

उत्तर प्रदेश।

बस्ती।। जनपद के विकास खंड गौर अंतर्गत ग्राम पंचायत वैदोलिया में इन दिनों प्रशासनिक लापरवाही और हठधर्मिता का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। आलम यह है कि जिलाधिकारी (DM) का आदेश फाइलों की धूल फांक रहा है और जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। 24 दिन बीत जाने के बाद भी नई समिति को कार्यभार न सौंपना न केवल व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि स्थानीय विकास को भी पूरी तरह ठप्प कर चुका है।

⭐क्या है पूरा मामला?

बीती 21 फरवरी 2026 को जिलाधिकारी ने पूर्व प्रधान श्रीमती ममता पाण्डेय के विरुद्ध जांच पूरी होने के उपरांत उनकी शक्तियों को प्रतिबंधित कर दिया था। इसके विकल्प के रूप में शासन ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया, जिसमें श्रीमती रेशमा देवी को समिति प्रमुख नियुक्त करते हुए PFMS चेकर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

⭐अधिकारियों की सुस्ती, जनता पस्त

हैरानी की बात यह है कि DM के आदेश की स्याही सूखे 24 दिन हो चुके हैं, लेकिन खंड विकास अधिकारी (BDO) गौर ने अभी तक नव-गठित समिति को न तो शपथ दिलाई है और न ही कार्यभार सौंपा है। पंचायत सचिव की भूमिका भी इस पूरे प्रकरण में संदिग्ध बनी हुई है। अब तक डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) न बनने के कारण FTO अप्रूवल और ऑनलाइन भुगतान पूरी तरह बंद है, जिससे गांव में चल रहे या प्रस्तावित विकास कार्य ‘कोमा’ में चले गए हैं।

⭐दफ्तरों के चक्कर काट रही समिति प्रमुख

समिति प्रमुख रेशमा देवी ने न्याय की गुहार लगाते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) से शिकायत की, जहां से उन्हें ADO पंचायत के पास भेज दिया गया। ADO पंचायत का कहना है कि उन्होंने सचिव को निर्देश दे दिए हैं, लेकिन सचिव महोदय ‘आज-कल’ के खेल में माहिर नजर आ रहे हैं। मीडिया से बातचीत में सचिव ने ‘परसों’ तक DSC बनाने का लॉलीपॉप तो थमाया, लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि यही आश्वासन पिछले 24 दिनों से मिल रहा है।

⭐सुलगते सवाल:

👉क्या पंचायत राज अधिनियम की धारा 95 के तहत गठित समितियां केवल कागजों पर काम करेंगी?

👉क्या संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाने के लिए भी किसी ‘विशेष मुहूर्त’ का इंतजार किया जा रहा है?

👉आखिर किसके संरक्षण में सचिव और ब्लॉक स्तर के अधिकारी DM के आदेश को ठेंगे पर रख रहे हैं?

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन की नींद कब टूटती है और वैदोलिया ग्राम पंचायत के विकास का पहिया दोबारा कब घूमता है। क्या रेशमा देवी को इस कार्यकाल में कार्यभार मिलेगा या फिर अधिकारियों की ‘टालमटोल’ नीति विकास कार्यों की बलि ले लेगी?

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