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बस्ती: गौर CHC में एनएम के हक पर ‘डाका’, 2021 से बकाया भुगतान ने खोली सिस्टम की पोल!

खून-पसीना एनएम का, मलाई काट रहे अधिकारी? गौर स्वास्थ्य केंद्र से आई घोटाले की गंध।

अजीत मिश्रा (खोजी)

  • बस्ती: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता स्वास्थ्य विभाग, ‘गौर’ में एनएम के पसीने पर अधिकारियों की ‘नजर’!
  • काम लिया पर दाम भूले: बस्ती में एनएम कर्मियों का फूटा गुस्सा, टीकाकरण ठप करने की चेतावनी।
  •  गौर CHC महाघोटाला: कोविड में जान दांव पर लगाने वाली एनएम बहनों को ही विभाग ने छला!
  • बस्ती स्वास्थ्य विभाग में ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’, 4 साल से एनएम के मानदेय पर कुंडली मारकर बैठे जिम्मेदार।
  • सावधान प्रशासन! अगर एनएम ने काम रोका तो वेंटिलेटर पर आ जाएगी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था।

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

बस्ती। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार भले ही पानी की तरह पैसा बहा रही हो, लेकिन बस्ती जिले के गौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की जो गंध आ रही है, उसने पूरी व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है। यहाँ तैनात एनएम (ANM) कर्मियों का दर्द अब आक्रोश बनकर फूट पड़ा है। आरोप है कि साल 2021 से अब तक उनके जायज भुगतान को विभाग के रसूखदार ‘सफेदपोश’ दबाए बैठे हैं।

कोविड की जंग जीतने वालों को ही अपनों ने छला

हैरानी की बात यह है कि जब पूरी दुनिया घरों में कैद थी, तब यही एनएम बहनें अपनी जान हथेली पर रखकर ‘कोविड टीकाकरण’ कर रही थीं। आज उसी सेवा के बदले मिलने वाली ₹12,000 की प्रोत्साहन राशि के लिए उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। टीबी (TBL) कार्यक्रम की ₹18,000 की राशि हो या डिलीवरी के प्रति केस मिलने वाले ₹450—हर मद में भ्रष्टाचार का दीमक लगा हुआ है।

  • लंबित भुगतानों का काला चिट्ठा:
  • टीबी कार्यक्रम: ₹18,000 प्रति एनएम (बकाया)
  • कोविड टीकाकरण: ₹12,000 प्रति एनएम (बकाया)
  • डिलीवरी कार्य: ₹450 प्रति केस (बकाया)
  • रजिस्ट्रेशन/अन्य मद: ₹3,100 (बकाया)
  • अन्य: पोलियो, फाइलेरिया और हाई रिस्क प्रेगनेंसी (HRP) का भुगतान भी गायब।

सिस्टम की संवेदनहीनता: काम लिया, दाम भूल गए!

निशा शर्मा, संध्या, रूबी वर्मा और रजनी यादव समेत दर्जनों एनएम कर्मियों ने जो आवाज उठाई है, वह सिर्फ एक शिकायत नहीं बल्कि जिला स्वास्थ्य प्रशासन के गाल पर एक जोरदार तमाचा है। सवाल यह है कि जब बजट आवंटित होता है, तो वह जाता कहाँ है? क्या गौर CHC के बाबू और जिम्मेदार अधिकारी इन गरीबों के हक के पैसे पर कुंडली मारकर बैठे हैं? प्रोत्साहन राशि के ₹200 तक का हिसाब न देना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं।

चेतावनी: ठप हो सकती हैं स्वास्थ्य सेवाएं

पीड़ित कर्मियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनके बकाये का जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो वे टीकाकरण समेत समस्त सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बंद कर देंगी। अगर ऐसा हुआ, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी उन लापरवाह अधिकारियों की होगी जो एयरकंडीशन कमरों में बैठकर फाइलों को दबा रहे हैं।

बड़ा सवाल: आखिर कब तक चलेगी ‘भुगतान की बंदरबांट’?

बस्ती के स्वास्थ्य महकमे के आला अधिकारियों को अब अपनी नींद तोड़नी होगी। क्या मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) इस ‘भुगतान घोटाले’ की जांच कराएंगे? या फिर जांच के नाम पर एक और खानापूर्ति कर दी जाएगी?

जनता और पीड़ित कर्मचारी अब जवाब मांग रहे हैं। यदि समय रहते न्याय नहीं मिला, तो यह आक्रोश सरकार की छवि को धूमिल करने के साथ-साथ जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी वेंटिलेटर पर ले जाएगा।

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