
अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨आबकारी विभाग की ‘मदहोशी’ या माफिया से ‘सेटिंग’? बनकटी बाज़ार में सुबह 6 बजे से ही बह रही है अवैध शराब की गंगा!🚨
बनकटी में सुबह-सुबह ‘मौत का सामान’: मंदिर जाने वाली महिलाओं और स्कूल जाते बच्चों का निकलना हुआ दूभर!
अजब गजब: बनकटी बाज़ार में ‘ईश-प्रार्थना’ से पहले ‘मधुशाला’ का स्वागत, आबकारी विभाग ने क्या माफिया के आगे टेके घुटने?
🚨 महा-खुलासा: बनकटी में सुबह 6 बजे से ‘शटर के नीचे’ का खेल, कहाँ है बस्ती का आबकारी विभाग?
बस्ती। लालगंज थाना क्षेत्र का बनकटी बाज़ार इन दिनों शराब माफियाओं और आबकारी विभाग के ‘अपवित्र गठबंधन’ का गवाह बना हुआ है। जहाँ प्रदेश सरकार कानून के राज का दावा कर रही है, वहीं बनकटी में नियमों को जूते की नोक पर रखकर सुबह 6 बजते ही दुकान के शटर के नीचे से मौत का सामान (देशी शराब) बिकना शुरू हो जाता है।
शटर के नीचे से ‘सेटिंग’ का खेल
हैरानी की बात यह है कि जिस वक्त आम नागरिक अपने दिन की शुरुआत ईश-प्रार्थना या सैर-सपाटे से करता है, बनकटी बाज़ार में पियक्कड़ों का हुजूम जमा हो जाता है। सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए, निर्धारित समय से घंटों पहले ही शराब की बिक्री शुरू कर दी जाती है। यह सब कुछ इतनी बेखौफ तरीके से हो रहा है कि मानो इन्हें किसी बड़े ‘सफेदपोश’ या विभागीय अधिकारी का सीधा अभयदान प्राप्त हो।
महिलाओं और बच्चों का निकलना दूभर
अवैध बिक्री के कारण सुबह-सुबह शराबियों के जमावड़े और उनकी अभद्र भाषा ने क्षेत्र के माहौल को पूरी तरह दूषित कर दिया है। स्कूल जाने वाले बच्चों और मंदिर जाने वाली महिलाओं का उस रास्ते से गुजरना दूभर हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग को कई बार सूचित किया गया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। ऐसा प्रतीत होता है कि आबकारी विभाग ने शराब माफियाओं के आगे घुटने टेक दिए हैं या फिर उनकी जेबें माफिया के ‘चंदे’ से गरम हैं।
प्रशासन की साख को खुली चुनौती
बनकटी बाज़ार का यह संगठित भ्रष्टाचार सीधे तौर पर जिला प्रशासन और शासन की साख को चुनौती दे रहा है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और शिकायतों पर आंखें मूंद लें, तो जनता किसके पास जाए? क्या आबकारी विभाग के पास इतनी शक्ति भी नहीं कि वह सुबह 6 बजे अवैध रूप से खुल रहे इन ठिकानों पर ताला जड़ सके? या फिर विभाग खुद इस अवैध कमाई का हिस्सेदार है?
जनता की मांग: अब आर-पार की कार्रवाई हो
क्षेत्र की जनता में इस लचर कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश है। लोग अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर कड़ी कार्रवाई चाहते हैं। सवाल यह है कि क्या बस्ती का जिला प्रशासन इन भ्रष्ट अधिकारियों और शराब माफियाओं के गठजोड़ पर नकेल कसेगा? या फिर इसी तरह ‘सुशासन’ के नाम पर भ्रष्टाचार का यह काला कारोबार फलता-फूलता रहेगा?
ब्यूरो चीफ,
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।





















