
अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨गुंडई के बाद जागी कुंभकर्णी नींद: एमओआईसी से मारपीट हुई तो याद आया ‘अवैध’ है अमित हॉस्पिटल 🚨
⭐स्वास्थ्य विभाग का ‘वसूली’ वाला चश्मा उतरा: मारपीट के बाद प्रशासन को दिखा अमित हॉस्पिटल का काला सच।
⭐यमराज के ठिकानों पर कब तक मेहरबान रहेगा महकमा? क्या हर कार्रवाई के लिए किसी के पिटने का इंतज़ार होगा?
⭐बस्ती: सल्टौआ का अमित हॉस्पिटल सीज, एमओआईसी से मारपीट के बाद जागी स्वास्थ्य विभाग की कुंभकर्णी नींद।
⭐बिना पंजीकरण चल रहे मौत के सौदागरों पर छापा, डिप्टी सीएमओ की टीम ने अमित हॉस्पिटल पर जड़ा ताला।
⭐अवैध अस्पताल, फर्जी दस्तावेज और गुंडई का संगम; अमित हॉस्पिटल पर प्रशासन का बड़ा एक्शन।
उत्तर प्रदेश।
बस्ती।। स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली अक्सर सवालों के घेरे में रहती है, लेकिन सल्टौआ क्षेत्र में जो हुआ उसने विभाग की ‘सुविधाजनक सक्रियता’ की पोल खोलकर रख दी है। सालों से अवैध रूप से फल-फूल रहे अमित हॉस्पिटल एंड अल्ट्रासाउंड सेंटर पर बुधवार को विभाग का डंडा चला और उसे सीज कर दिया गया। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस कार्रवाई के लिए क्या किसी अधिकारी का पिटना अनिवार्य था?
🚨जब तक नहीं बही रंज़िश, तब तक सब था ‘लीगल’?
हैरानी की बात है कि जो अस्पताल लंबे समय से बिना वैध पंजीकरण और मानकों को ताक पर रखकर चल रहा था, वह अब तक स्वास्थ्य विभाग की नज़रों से ओझल कैसे रहा? चर्चा है कि जब तक अस्पताल में तैनात एमओआईसी डॉ. अमित कन्नौजिया के साथ मारपीट की घटना नहीं हुई, तब तक प्रशासन ‘सब चंगा है’ की मुद्रा में था। जैसे ही खाकी और सफेदपोशों के बीच टकराव हुआ, विभाग को अचानक अपनी नियमावली और सीलिंग की मुहर याद आ गई।
🚨कार्रवाई का घटनाक्रम
⭐नेतृत्व: डिप्टी सीएमओ डॉ. एसबी सिंह के नेतृत्व में टीम ने मारा छापा।
⭐चूक: जांच में न पंजीकरण मिला, न ही अल्ट्रासाउंड संचालन के जरूरी दस्तावेज।
⭐परिणाम: पुलिस बल की मौजूदगी में तत्काल प्रभाव से अस्पताल को सीज कर दिया गया।
🚨दलाली और मौत के सौदागरों पर कब होगा प्रहार?
अमित हॉस्पिटल का सीज होना महज एक बानगी है। जनपद में ऐसे दर्जनों ‘यमराज के ठिकाने’ बिना रोक-टोक चल रहे हैं। क्या स्वास्थ्य विभाग को हर बार किसी अप्रिय घटना या मारपीट का इंतज़ार रहेगा? अधिकारियों का कहना है कि अभियान जारी रहेगा, लेकिन जनता पूछ रही है कि इन अवैध केंद्रों को ऑक्सीजन देने वाले सफेदपोशों पर कार्रवाई कब होगी?
“अस्पताल के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं थे। मारपीट की घटना के बाद जांच तेज की गई और अनियमितताएं मिलने पर इसे सीज कर दिया गया है। अवैध सेंटरों को बख्शा नहीं जाएगा।”
— स्वास्थ्य विभाग (प्रशासन)
“क्या ये भी अवैध हैं?”
सूत्रों की मानें तो जिले में अभी भी कई ऐसे ‘अस्पताल’ और ‘अल्ट्रासाउंड सेंटर’ चल रहे हैं जिनके पास न तो डिग्री है और न ही फायर विभाग की एनओसी। क्या विभाग इन पर भी सर्जिकल स्ट्राइक करेगा या फिर किसी और ‘मारपीट’ की घटना का इंतज़ार है?





















