
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। सौ दिन में चार गुना रकम और जमीन का झांसा देकर करोड़ों रुपये ले भागे ।।
🚨”निवेशकों की उड़ी नींद: न मिली जमीन, न वापस आया पैसा; अब बैंक की किश्तें बनीं गले की फांस”
🚨”100 दिन में चार गुना रकम का ‘मायाजाल’, करोड़ों डकार कर रफूचक्कर हुई कंपनी”
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
बस्ती जिले में ‘डीडब्ल्यूसी’ (DWC) नामक एक फर्जी कंपनी ने लोगों को अल्प समय में अत्यधिक लाभ और जमीन देने का प्रलोभन दिया। कंपनी ने बस्ती के बड़ेवन क्षेत्र के पास एक होटल में अपना कार्यालय खोला था, जिससे स्थानीय लोगों में विश्वसनीयता बनी। धोखाधड़ी इतनी सोची-समझी थी कि पीड़ितों ने बैंक से भारी-भरकम लोन लेकर इस योजना में निवेश कर दिया।
ठगी का तरीका: निवेशकों को 100 दिनों में उनके पैसे को चार गुना करने का सपना दिखाया गया। साथ ही गोरखपुर या संतकबीरनगर (खलीलाबाद) में जमीन की रजिस्ट्री करने का वादा भी किया गया।
पीड़ितों का प्रोफाइल: पीड़ितों में मध्यमवर्गीय परिवार और किसान शामिल हैं। उदाहरण के लिए, ग्राम महुडर के दो भाइयों—इंद्रजीत और राधेश्याम—ने मिलकर करीब ₹35 लाख से अधिक का निवेश किया।
बैंक ऋण का जाल: ठगों ने लोगों को बैंक से लोन लेने के लिए भी उकसाया। पीड़ितों ने IDFC और इंडियन बैंक जैसे संस्थानों से सीसी (CC) लोन लेकर कंपनी में पैसे जमा किए।
आरोपियों की कार्यप्रणाली: आरोपी लखनऊ और संतकबीरनगर के निवासी बताए जा रहे हैं। उन्होंने जनवरी 2026 में जमीन की रजिस्ट्री करने का झूठा भरोसा दिया था और अंततः कार्यालय बंद कर फरार हो गए।
१. मनोवैज्ञानिक प्रलोभन (Psychological Hook)
यह मामला ‘पोंजी स्कीम’ (Ponzi Scheme) का एक क्लासिक उदाहरण है। ठगों ने “100 दिन में चार गुना” जैसे अवास्तविक रिटर्न का लालच दिया। आम तौर पर कोई भी कानूनी निवेश संस्था इतना अधिक रिटर्न नहीं दे सकती। यह स्पष्ट करता है कि ठगों ने लोगों के लालच और वित्तीय असुरक्षा का फायदा उठाया।
२. संस्थागत विश्वास का दुरुपयोग
कंपनी ने एक प्रतिष्ठित होटल में कार्यालय खोलकर अपनी ‘वैधता’ का प्रदर्शन किया। इसके अलावा, ठगों द्वारा लोगों को जमीन दिखाने ले जाना भी उनके ‘धोखाधड़ी के मॉडल’ का हिस्सा था ताकि निवेशकों को लगे कि उनके पैसे के बदले संपत्ति मौजूद है।
३. वित्तीय ऋण का बोझ
इस मामले का सबसे दुखद पहलू यह है कि पीड़ितों ने अपनी बचत के साथ-साथ बैंक ऋण का पैसा भी गंवा दिया। अब वे न केवल मूल धन खो चुके हैं, बल्कि बैंक के ब्याज और किश्तों के कर्ज के जाल में भी फंस गए हैं, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है।
४. प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति
एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच के बाद प्राथमिकता के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। हालांकि, ऐसे मामलों में अक्सर अपराधी पैसे को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे रिकवरी एक बड़ी चुनौती बन जाती है।
निष्कर्ष एवं सुझाव
यह समाज के लिए एक चेतावनी है। वित्तीय साक्षरता की कमी के कारण लोग आज भी ऐसी फर्जी योजनाओं का शिकार हो रहे हैं।
जनता को सलाह: किसी भी निवेश से पहले कंपनी के पंजीकरण (SEBI या RBI द्वारा मान्यता) की जांच अवश्य करें। “अति-लाभकारी” योजनाओं से हमेशा बचें।
प्रशासनिक आवश्यकता: पुलिस और साइबर सेल को होटल मालिकों और बैंक प्रतिनिधियों की भूमिका की भी जांच करनी चाहिए, जिन्होंने ऋण प्रक्रिया में अनजाने में या जानबूझकर इन ठगों की सहायता की हो।






















