
अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨बस्ती में लोकतंत्र लहूलुहान: जब ‘सच’ दिखाने पर गुंडों ने पत्रकार का गला दबाया🚨
⚡”बस्ती में ‘कलम’ पर भारी ‘कट्टा-तंत्र’: पेट्रोल पंप पर गुंडागर्दी की कवरेज कर रहे पत्रकार पर जानलेवा हमला!”
⚡”खौफनाक: बस्ती में पत्रकार वेदिक द्विवेदी पर हमला, पंप चालक के गुंडे तरुण सिंह ने सरेआम की मारपीट।”
⚡”साहब! ये कैसी ‘सामान्य स्थिति’ है? जहां पत्रकार को सच बोलने पर मिलती है गुंडों की मार!”
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
बस्ती। उत्तर प्रदेश में सुशासन के दावों के बीच बस्ती मंडल से आई एक रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर ने प्रशासन की पोल खोलकर रख दी है। दुबखरा स्थित भारत पेट्रोलियम पंप पर जो हुआ, वह केवल एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि प्रदेश की कानून व्यवस्था को दी गई सीधी चुनौती है। कैमरे के सामने एक पत्रकार को सरेआम धमकाना, उसका गला दबाना और मारपीट करना यह साबित करता है कि जिले में अपराधियों के मन से पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है।
💫एडीएम के दावे बनाम जमीनी हकीकत
अजीब विडंबना है कि एक तरफ एडीएम प्रतिपाल सिंह बयान जारी कर कह रहे हैं कि “स्थिति सामान्य है”, वहीं दूसरी ओर जनता पेट्रोल की एक-एक बूंद के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है। जब पत्रकार वेदिक द्विवेदी ने इसी ‘झूठ’ को बेनकाब करने के लिए मौके पर रिपोर्टिंग शुरू की, तो पंप चालक के कथित गुर्गे तरुण सिंह ने उन पर हमला बोल दिया।
सवाल यह है: अगर स्थिति सामान्य है, तो वहां लंबी कतारें क्यों थीं? और अगर सब कुछ पारदर्शी है, तो कैमरे से इतनी घबराहट क्यों? क्या पंप पर तेल की कालाबाजारी हो रही थी, जिसे छुपाने के लिए गुंडों का सहारा लिया गया?
💫पंप पर ‘गुंडा-राज’, प्रशासन मौन
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह तरुण सिंह ने पत्रकार का माइक छीनने की कोशिश की और उन पर शारीरिक हमला किया। यह घटना दर्शाती है कि जिले के कुछ पेट्रोल पंप अब जनसुविधा केंद्र नहीं, बल्कि ‘दबंगों के अड्डे’ बन चुके हैं। पत्रकार का दोष सिर्फ इतना था कि वह आम जनता की आवाज उठा रहा था।
💫कब होगी ‘बुलडोजर’ वाली कार्रवाई?
बस्ती की जनता और पत्रकार समाज अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की ओर देख रहा है, जिसका ढिंढोरा पीटा जाता है।
👉क्या पत्रकार पर हाथ उठाने वाले इन गुंडों पर रासुका (NSA) जैसी कड़ी कार्रवाई होगी?
👉क्या प्रशासन उन अधिकारियों पर भी नकेल कसेगा जो बंद कमरों में बैठकर ‘सब ठीक है’ का भ्रम फैला रहे हैं?
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमले की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला बस्ती जनपद के दुबखरा स्थित भारत पेट्रोलियम पंप का है, जहां अव्यवस्थाओं की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार वेदिक द्विवेदी पर पंप चालक के कथित गुंडे तरुण सिंह ने जानलेवा हमला कर दिया। यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि सच की आवाज को दबाने की एक सोची-समझी साजिश है।
💫दहशत का केंद्र बना पेट्रोल पंप
एक तरफ जिले के एडीएम प्रतिपाल सिंह कागजों पर दावा कर रहे हैं कि “स्थिति सामान्य है” और पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। दुबखरा पंप पर लगी लंबी कतारें और वहां व्याप्त अफरातफरी प्रशासन के दावों की पोल खोल रही थीं। जब पत्रकार वेदिक द्विवेदी इन अव्यवस्थाओं को जनता के सामने लाने का अपना पेशेवर दायित्व निभा रहे थे, तभी तरुण सिंह नामक व्यक्ति ने उन पर हमला बोल दिया।
💫प्रशासनिक विफलता और गुंडों के हौसले बुलंद
सवाल यह उठता है कि जब प्रशासन शांति का दावा कर रहा है, तो सार्वजनिक स्थानों पर इन “सफेदपोश गुंडों” को कानून हाथ में लेने की हिम्मत कहां से मिल रही है?
🔔अव्यवस्था: क्या पंप पर लंबी लाइनें प्रशासनिक कुप्रबंधन का नतीजा नहीं हैं?
🔔सुरक्षा: ड्यूटी पर तैनात पत्रकार के साथ मारपीट होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा सवालिया निशान खड़ा करता है।
🔔दबंगई: क्या अब बस्ती में रिपोर्टिंग करने के लिए गुंडों से अनुमति लेनी होगी?
💫कार्रवाई का इंतज़ार: कब जागेगा तंत्र?
पत्रकार पर हमला सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंटना है। इस घटना ने जिले के पत्रकार जगत में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। अब सबकी निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या तरुण सिंह जैसे अराजक तत्वों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी, या फिर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?
ब्यूरो चीफ की टिप्पणी: “अगर सच दिखाने की कीमत खून से चुकानी पड़े, तो यह समाज और लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। हम इस हमले की पुरजोर निंदा करते हैं और प्रशासन से मांग करते हैं कि दोषियों को तत्काल जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए।”
निष्कर्ष: कलम को डराने की कोशिशें नई नहीं हैं, लेकिन बस्ती की यह घटना प्रशासन के माथे पर कलंक है। अगर 24 घंटे के भीतर दोषियों पर ऐसी कार्रवाई नहीं हुई जो मिसाल बने, तो यह माना जाएगा कि बस्ती में लोकतंत्र नहीं, बल्कि ‘लाठी तंत्र’ चल रहा है।
ब्यूरो चीफ, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)





















