
अजीत मिश्रा (खोजी)
🙊 बस्ती स्वास्थ्य विभाग: भ्रष्टाचार का ‘इलाज’ कौन करेगा? नियमों की बलि चढ़ाकर अपनों पर मेहरबानी🙊
रविवार 25 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।
बस्ती। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का स्वास्थ्य महकमा इन दिनों मरीजों के इलाज के लिए नहीं, बल्कि महकमे के भीतर चल रहे ‘नियम-विरुद्ध’ खेल और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. राजीव निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए भारतीय किसान यूनियन (भानू) ने मोर्चा खोल दिया है। आरोप बेहद संगीन हैं—नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को कुर्सियां बांटना और करोड़ों के बजट पर ‘नजर’ गड़ाना।
कनिष्ठ को ‘कुबेर’ का खजाना: नियम आखिर किसके लिए?
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि क्या बस्ती स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नियमावली महज कागजी टुकड़ा बनकर रह गई है? भाकियू (भानू) के जिला उपाध्यक्ष उमेश गोस्वामी का आरोप है कि CMO डॉ. निगम ने पद संभालते ही वरिष्ठ डॉक्टरों की वरिष्ठता को रौंदते हुए L-3 श्रेणी के डॉक्टर बृजेश शुक्ला को ‘सुपर पावर’ बना दिया।
हैरानी की बात यह है कि एक कनिष्ठ अधिकारी को RCH, CMSD (स्टोर), NCD और PHC हरैया जैसे महत्वपूर्ण प्रभार एक साथ सौंप दिए गए। सवाल उठता है कि क्या पूरे जिले में वरिष्ठ और योग्य डॉक्टरों का अकाल पड़ गया था, या फिर इस ‘मेहरबानी’ के पीछे कोई गहरा आर्थिक गणित है?
👉’मार्च लूट’ की आहट और करोड़ों का खेल
शिकायती पत्र में केवल पद के दुरुपयोग का ही जिक्र नहीं है, बल्कि करोड़ों रुपये के सरकारी धन के गबन की आशंका भी जताई गई है। यूनियन का सीधा आरोप है कि CMO और उनके चहेते अधिकारी की यह जुगलबंदी आगामी वित्तीय वर्ष के अंत (फरवरी-मार्च) में ‘बजट ठिकाने’ लगाने की बड़ी साजिश का हिस्सा है। क्या स्टोर और सरकारी योजनाओं का बजट जनता की सेवा के लिए है या अधिकारियों की तिजोरी भरने के लिए? यह जांच का बड़ा विषय है।
👉साक्ष्यों का ‘पुलिंदा’ और राजभवन की दहलीज
यूनियन का दावा है कि उन्होंने ‘मानव संपदा’ पोर्टल के विवरण और शासन के नियमों की प्रति जैसे पुख्ता सबूत राज्यपाल को भेजे हैं। उमेश गोस्वामी का यह बयान तंत्र पर करारा प्रहार है:
“स्थानीय स्तर पर रसूख के दम पर जांच दबा दी गई, इसीलिए हमें महामहिम राज्यपाल की शरण लेनी पड़ी।”
👉प्रमुख मांगें:
🔥CMO डॉ. राजीव निगम और डॉ. बृजेश शुक्ला का तत्काल निलंबन।
🔥उच्च स्तरीय जांच और भ्रष्टाचार के माध्यम से गबन की गई राशि की रिकवरी।
🔥नियमों के विरुद्ध बांटे गए प्रभारों की तत्काल वापसी।
स्वास्थ्य विभाग की यह तस्वीर डरावनी है। जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आने लगें, तो व्यवस्था से आम आदमी का भरोसा उठना लाजमी है। अब देखना यह है कि राजभवन के हस्तक्षेप के बाद क्या बस्ती के स्वास्थ्य विभाग की ‘सर्जरी’ होगी, या भ्रष्टाचार का यह संक्रमण ऐसे ही फैलता रहेगा?




















