
दिनेश कौसिक महामंत्री जिला पलवल बीजेपी
चुनाव आयोग पर लगाए गए विपक्ष के झूठे दावों की सच्चाई- दिनेश कौशिक (जिला महामंत्री भाजपा)पलवल [21 नवंबर 2025] भारतीय लोकतंत्र में चुनाव आयोग और मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना विपक्ष की एक सोची-समझी रणनीति बन गई है। विशेष रूप से SIR (Special Intensive Revision) को लेकर जिस प्रकार का भ्रामक प्रचार किया जा रहा है उसका पर्दाफाश करना अत्यंत आवश्यक है। हाल के दिनों में विपक्ष द्वारा उठाए गए आरोपों की हवा निकल चुकी है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि हरियाणा के एक ही घर में 501 वोट हैं। चुनाव आयोग की जांच में स्पष्ट हुआ कि हाउस नंबर 265 (जिसे गलती से 501 समझा गया) कोई छोटा मकान नहीं, बल्कि एक एकड़ का पुश्तैनी प्लॉट है जहाँ कई परिवार पीढ़ियों से रह रहे हैं। यह व्यवस्था तब से चली आ रही है जब हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी।
विपक्ष ने एक 34 वर्षीय महिला की आयु 124 वर्ष बताकर हंगामा किया। स्वयं मिंटा देवी ने स्वीकार किया कि ऑनलाइन आवेदन के समय उनसे हुई मानवीय त्रुटि के कारण यह गलती हुई थी। बिहार के सुबोध कुमार और रंजू देवी को लेकर लगाए गए ‘नाम काटने’ के आरोप भी झूठे निकले। रंजू देवी ने स्वयं माना कि उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के कहने पर गलत जानकारी दी थी। कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्यों में भी कांग्रेस द्वारा लगाए गए इसी तरह के आरोप मीडिया और जांच में पूरी तरह निराधार साबित हुए हैं।
विपक्ष की राजनीति ‘चित भी मेरी, पट भी मेरी’ के सिद्धांत पर आधारित है।जब भाजपा चुनाव हारती है तो मतदाता सूची और चुनाव आयोग महान हो जाते हैं। जब विपक्ष चुनाव हारता है तो वही मतदाता सूची खराब और आयोग निकम्मा लगने लगता है।
लोकतंत्र में ऐसे दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे।
दोहरी नागरिकता और फर्जी आईडी का सच
विपक्ष के कई बड़े नेताओं और उनके करीबियों की मतदाता सूची में स्थिति संदिग्ध रही है। यह विडंबना ही है कि जो SIR को वोट चोरी कह रहे हैं उनमें से कई के पास कथित तौर पर दोहरी वोटर आईडी या अनियमितताएं पाई गई हैं।
प्रशांत किशोर, पवन खेड़ा, तेजस्वी यादव, टी. सिद्दीकी (कांग्रेस), संजय सिंह (AAP), और किशोरी पेडनेकर (UBT शिवसेना) जैसे नामों के साथ दोहरे वोटर आईडी या फर्जी आईडी के विवाद जुड़े रहे हैं।
SIR का उद्देश्य वोट चोरी रोकना है न कि वोट काटना। हमारे देश में कुछ राजनीतिक परिवार दशकों से अवैध तरीके से वोटों की चोरी कर रहे हैं। जहाँ विपक्ष ‘घुसपैठिया-बचाओ’ यात्रा निकाल रहा है वहीं केंद्र सरकार और चुनाव आयोग मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए प्रतिबद्ध हैं।
जनता देख रही है कि किस प्रकार तमिलनाडु में हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा करने वाले न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग लाया गया और कैसे तुष्टिकरण की राजनीति की जा रही है। देश की जागरूक जनता ऐसे तत्वों को कभी माफ नहीं करेगी।