

मेला गुगहाल में बाइक पार्किंग शुल्क में धांधली, प्रशासन बेखबर*
रिपोर्ट अलिक सिंह
सहारनपुर। मेला गुगहाल में इस बार पार्किंग शुल्क को लेकर जनता के बीच काफी नाराजगी देखी जा रही है। देश भर में सबसे महंगी बाइक पार्किंग होने के बावजूद, पार्किंग पर्ची पर न नगर निगम की मोहर है और न ही कोई निर्धारित रेट। बिना किसी सरकारी अनुमति
या दिशा-निर्देश के, मनमाने ढंग से पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है। जबकि नगर निगम के बाबू राहुल कुमार ने बताया कि 20 रुपए बाइक ओर 50 रुपए कार पार्किंग के निर्धारित किए गए है। परंतु घोल माल यह सब प्रशासन और मेला समिति की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी बेखबर नजर आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मेला चेयरमैन और नगर निगम की ओर से कोई स्पष्ट नियम या दिशानिर्देश नहीं जारी किए गए हैं। बाइक पार्किंग के लिए सीधे 50 रुपये वसूले जा रहे हैं, जो पूरे प्रदेश में सबसे महंगा पार्किंग शुल्क माना जा रहा है। पार्किंग पर्चियों पर नगर निगम की मोहर का अभाव इस ओर इशारा करता है कि यह पार्किंग ठेकेदारों द्वारा मनमानी तरीके से शुल्क वसूलने का एक साधन बन गया है।
जनता की नाराजगी और प्रशासन की लापरवाही
स्थानीय निवासी शाह हसन सिद्दीकी ने बताया, “हर बार जब मेला आता है, पार्किंग शुल्क बढ़ जाता है, लेकिन इस बार यह हद पार कर गया है। पर्ची पर कोई जानकारी नहीं होती और जब सवाल करते हैं तो हमें धमकाया जाता है।” वहीं, एलिक सिंह नामक एक अन्य नागरिक ने बताया, “पार्किंग ठेकेदार मनमाने ढंग से शुल्क ले रहे हैं, और जब शिकायत की जाती है तो कोई सुनवाई नहीं होती।”
पार्किंग में लापरवाही और मनमानी वसूली के कारण लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कई लोगों ने प्रशासन से इस मुद्दे पर संज्ञान लेने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि पार्किंग व्यवस्था में पारदर्शिता और उचित शुल्क निर्धारण होना चाहिए, ताकि जनता के साथ इस तरह का अन्याय न हो।
*प्रशासन क्या कर रहा है?*
नगर निगम के अधिकारियों और मेला चेयरमैन से इस बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। जब उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि “मामले की जांच की जाएगी।” लेकिन सवाल यह उठता है कि बिना जांच और उचित दिशा-निर्देशों के, यह धांधली आखिर कब तक चलती रहेगी? मेला खत्म हो जाएगा फिर वही ढाक के तीन पात
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और पार्किंग शुल्क में पारदर्शिता कब आएगी।















