जयपुरराजस्थान

राजस्थान में खनन विभाग के आदेशों ने खोली पोल

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी दरकिनार कर अरावली में नए पट्टे बांट रही है भजनलाल सरकार

जयपुर, 24 दिसंबर 2025:* राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने अरावली क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार द्वारा नए खनन पट्टे जारी करने की प्रक्रिया पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि एक ओर केंद्र सरकार अरावली संरक्षण का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर राजस्थान की भाजपा सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ा रही है।

*1. मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के बयानों में विरोधाभास:*

श्री गहलोत ने कहा कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव दावा कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जब तक ‘मैनेजमेंट प्लान फॉर सस्टेनेबल माइनिंग’ (MPSM) तैयार नहीं हो जाता, तब तक अरावली की 100 मीटर से ऊंची या नीची, किसी भी पहाड़ी पर नया खनन पट्टा नहीं दिया जाएगा। लेकिन राजस्थान सरकार ने 14 नवंबर 2025 को आदेश क्रमांक: निदे/अ.ख.अ. नीलामी / नीलामी (ML 10)/2025/ई- 13327 126 नए खनन पट्टे जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जिसमें 50 पट्टे अरावली रेंज वाले 9 जिलों जयपुर, अलवर, झुंझुनूं, राजसमंद, उदयपुर, अजमेर, सीकर, पाली और ब्यावर के हैं। 20 नवंबर को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद, अरावली रेंज में आने वाले 50 खनन पट्टों की नीलामी प्रक्रिया को नहीं रोका बल्कि 30 नवंबर 2025 को आदेश निकालकर प्रमाणित किया कि अरावली रेंज में आने के बावजूद ये 50 पट्टे अरावली का हिस्सा नहीं हैं।

*2. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी:*

पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से MPSM के बिना नए पट्टों पर रोक लगाई है, तो राजस्थान सरकार किस आधार पर नीलामी जारी रख रही है? सरकार ने हाईकोर्ट में यह तर्क देकर दिसंबर में इन पट्टों की नीलामी कर दी की है कि ये पहाड़ 100 मीटर से नीचे हैं, इसलिए अरावली में नहीं आते जबकि सुप्रीम कोर्ट का MPSM का फैसला 100 मीटर से ऊपर व नीचे दोनों की पहाड़ियों पर लागू होगा। यह न केवल सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मंशा के खिलाफ है, बल्कि अरावली के अस्तित्व को मिटाने की एक बड़ी साजिश है।

*यह एक उदाहरण है कि आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आड़ कैसे तकनीकी रास्ते निकालकर पूरे अरावली में खनन का प्रयास किया जाएगा।*

*3. साधु-संतों का आंदोलन और सरकार की गंभीरता:*

श्री गहलोत ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा दो दिन से अरावली बचाने के भाषण दे रहे हैं परन्तु उनके गृह जिले के भरतपुर के पड़ोसी डीग में साधु-संत अवैध खनन के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। उनके अपने क्षेत्र में अरावली सुरक्षित नहीं है और वे दूसरी जगह जाकर प्रवचन दे रहे हैं।

*4. जवाबदेही से भाग रही है सरकार:*

श्री गहलोत ने आरोप लगाया कि भूपेंद्र यादव जी न तो ‘केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति’ (CEC) को कमजोर करने पर जवाब दे सके हैं और न ही सरिस्का के प्रोटेक्टेड एरिया में महज तीन दिन में किए गए बदलावों पर कोई सफाई दे पाए हैं।

*श्री गहलोत ने कहा कि चूँकि मुख्यमंत्री स्वयं खनन मंत्री भी हैं, उन्हें प्रदेश की जनता को जवाब देना चाहिए कि “क्या वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले और अपने ही केंद्रीय मंत्री के बयानों के खिलाफ जाकर अरावली में बिना MPSM के नए पट्टे जारी करेंगे?”*

Back to top button
error: Content is protected !!