

अहिल्यानगर (प्रतिनिधि) – श्रीरामपुर उप-पंजीयक कार्यालय में भ्रष्टाचार, दलालशाही और फर्जी रजिस्ट्रियों का जाल फैलने का गंभीर आरोप लगाया गया है। यह आरोप किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकार का है। राजेश बोरुडे, शिवाजी दांडगे और सुधीर तुपे ने मिलकर पुणे स्थित पंजीयन महानिरीक्षक एवं मुद्रांक नियंत्रक तथा सह जिला निबंधक, अहिल्यानगर को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस कार्यालय में कोई भी दस्तावेज (दस्त) या रजिस्ट्री तभी होती है, जब तयशुदा स्टांप शुल्क के अलावा दलालों के माध्यम से मोटी रकम रिश्वत के रूप में दी जाए। जिन नागरिकों के कागजात पूरे होते हैं, उनके दस्त भी जानबूझकर अटकाए जाते हैं और छोटी-छोटी आपत्तियां निकालकर महीनों रोका जाता है। लेकिन वही दस्त, जब दलालों को पैसे थमाए जाते हैं, तो बिना किसी अड़चन के तुरंत रजिस्ट्री हो जाती है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कई मामलों में फर्जी कागजातों के आधार पर बोगस रजिस्ट्री की गई है। इससे न सिर्फ शासन का राजस्व नुकसान हो रहा है, बल्कि असली जमीन मालिकों के अधिकार भी खतरे में पड़ रहे हैं। इस तरह के काले कारनामों में कार्यालय के कुछ कर्मचारी, अधिकारी और दलाल आपसी मिलीभगत से काम कर रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इन भ्रष्टाचार से जुड़ी कमाई से उप-पंजीयक और दलालों ने भारी मात्रा में अवैध संपत्ति खड़ी की है। इस संपत्ति की भी जांच कर जब्त करने की मांग की गई है।
उप-पंजीयक और संबंधित दलालों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत तत्काल मामला दर्ज हो।
पिछले तीन वर्षों की सभी रजिस्ट्रियों की विशेष जांच कर बोगस रजिस्ट्रियां रद्द की जाएं।
अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति की जांच कर उसे जब्त किया जाए।
कार्यालय में पारदर्शिता के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और लाइव फुटेज दर्शनी भाग में दिखाया जाए।
शिकायतकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर इस पूरे प्रकरण में तुरंत और कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। इस शिकायत की प्रत मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री और अपर मुख्य सचिव (मुद्रांक व पंजीयन) को भी भेजी गई है।





