
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। लालगंज में ‘विकास’ का महाघोटाला: कागजों में दौड़ा मनरेगा का पहिया, जमीन पर सूखे हैंडपंप और खाली हाथ मजदूर ।।
उत्तर प्रदेश।
बस्ती/कुदरहा: उत्तर प्रदेश सरकार भले ही भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करे, लेकिन कुदरहा विकास खण्ड के लालगंज गाँव में ये दावे कागजों के ढेर में दफन होते दिख रहे हैं। यहाँ मनरेगा की धनराशि के नाम पर जो ‘लूट’ मची है, वह न केवल सरकारी तंत्र की विफलता को बयां करती है, बल्कि गरीबों के पेट पर लात मारने जैसा घिनौना कृत्य भी है।
💫95 लाख का गबन: क्या हवा में हुआ विकास?
सूत्रों और ग्रामीणों की मानें तो लालगंज में मनरेगा के तहत करीब 95 लाख रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि गाँव की धरातलीय हकीकत और सरकारी फाइलों में जमीन-आसमान का अंतर है। जहाँ कागजों में विकास कार्य पूरे होने का दावा किया गया है, वहाँ हकीकत में धूल उड़ रही है और काम का नामोनिशान तक नहीं हैं।
सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि गाँव के वास्तविक मजदूर काम की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन मस्टरोल (Muster Roll) पर उनकी हाजिरी भरी जा रही है। इसका सीधा अर्थ है कि गरीबों के हक की गाढ़ी कमाई उनके नाम पर निकालकर किसी और की जेब में जा रही है। जो पैसा मजदूरों के चूल्हे जलाने के लिए आया था, वह चंद भ्रष्टाचारियों की तिजोरी गर्म कर रहा है।
💫प्यासे हैंडपंप और फाइलों में ‘पानी’
गाँव में पानी की किल्लत जगजाहिर है। कागजों में दर्जनों हैंडपंपों का ‘रिबोर’ दिखाकर लाखों रुपये डकार लिए गए, जबकि हकीकत में ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। फाइलों में पानी का बहाव तो बहुत तेज है, लेकिन धरातल पर हैंडपंप सूखे पड़े हैं।
💫निशाने पर प्रधान और मौन प्रशासन
गाँव की महिला प्रधान लक्ष्मी गुप्ता पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है कि आखिर किसके संरक्षण में यह खेल चल रहा है? विभागीय अधिकारियों की चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े करती है। क्या जिम्मेदार अधिकारी इस खुली लूट से अनजान हैं या फिर ‘सुविधा शुल्क’ ने उनकी आँखों पर पट्टी बाँध रखी है?
💫उबल रहा है लालगंज, क्या होगी कार्रवाई?
लालगंज के ग्रामीण अब गुस्से के मुहाने पर हैं। वे इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों के बीच अब यह चर्चा आम है कि क्या शासन-प्रशासन इस लूट पर लगाम लगाएगा या फिर सत्ता और रसूख के रसूखदार ‘मैनेजमेंट’ के आगे गरीबों का हक हमेशा की तरह दब जाएगा?
लालगंज में मनरेगा के तहत करीब 95 लाख रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि गाँव की धरातलीय हकीकत और सरकारी फाइलों में जमीन-आसमान का अंतर है। जहाँ कागजों में विकास कार्य पूरे होने का दावा किया गया है, वहाँ हकीकत में सिर्फ धूल उड़ रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना कार्य के सत्यापन (Physical Verification) के लाखों रुपये का भुगतान कैसे संभव हुआ?
💫जिम्मेदार अधिकारी बने मूकदर्शक
इस पूरे खेल में सबसे बड़ा सवाल कुदरहा के खंड विकास अधिकारी (BDO) की भूमिका पर उठ रहा है। मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों की गुणवत्ता और कार्य की सत्यता परखने की जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारी और उनके तकनीकी सहायकों की होती है। यदि गाँव में हैंडपंप सूखे पड़े हैं और मजदूर काम को तरस रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर विभागीय अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत को दर्शाता है। क्या BDO कार्यालय की निगरानी इतनी कमजोर है कि 95 लाख का गबन हो गया और उन्हें भनक तक नहीं लगी?
💫मजदूरों की मजदूरी पर डाका
गाँव के मजदूर काम की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन मस्टरोल (Muster Roll) पर उनकी हाजिरी भरी जा रही है। इसका सीधा अर्थ है कि गरीबों के हक की गाढ़ी कमाई उनके नाम पर निकालकर किसी और की जेब में जा रही है। जो पैसा मजदूरों के चूल्हे जलाने के लिए आया था, वह चंद भ्रष्टाचारियों की तिजोरी गर्म कर रहा है, और विभाग खामोश है।
💫क्या अब भी जागेगा प्रशासन?
महिला प्रधान लक्ष्मी गुप्ता पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच, ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो। सवाल यह भी है कि क्या खंड विकास अधिकारी इस मामले में खुद को पाक-साफ साबित कर पाएंगे?
लालगंज के ग्रामीण अब सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। वे पूछ रहे हैं कि क्या विकास के नाम पर यह लूट खसोट और कब तक चलेगी? क्या जिलाधिकारी महोदय इस मामले को संज्ञान में लेकर संबंधित खंड विकास अधिकारी और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करेंगे?
अब देखना है कि लालगंज की जनता का गुस्सा रसूखदार तंत्र को सबक सिखाता है, या फिर यह फाइल भी किसी रद्दी की टोकरी में दबकर रह जाएगी।
आने वाला समय बताएगा कि लालगंज की जनता का गुस्सा भ्रष्ट तंत्र का ‘काँटों का ताज’ बनेगा या रसूखदार फिर से पाक-साफ निकल जाएंगे। फिलहाल, इस बड़े घोटाले ने सरकारी दावों की कलई खोलकर रख दी है।
















