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“विकास की बलि, भ्रष्टाचार की होली: संतकबीरनगर में 10.64 करोड़ का ‘पंचायत डकैती’ कांड”

"भ्रष्ट प्रधानों और सचिवों पर प्रशासन का हंटर: 134 जोड़ियों से होगी 10.64 करोड़ की पाई-पाई वसूली"

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका: संतकबीरनगर में 10.64 करोड़ का ‘पंचायत घोटाला’।।

🔥प्रशासनिक रडार पर 134 प्रधान और 134 सचिव; विकास के नाम पर हुआ बंदरबांट, अब होगी ‘कुर्की’ वाली वसूली!

🔥”सरकारी खजाने पर अपनों का ही डाका: विकास के नाम पर प्रधान-सचिव ने भरी जेबें, अब ‘कुर्की’ का डर”

🔥”संतकबीरनगर महाघोटाला: 268 ‘लुटेरों’ को नोटिस, 15 दिन में हिसाब दो या जमीन बेचकर भरो!”

🔥”गांवों के हक पर ‘सांप’ बनकर बैठे 134 प्रधान और सचिव; ऑडिट में खुला 10 करोड़ के गबन का कच्चा चिट्ठा”

बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।

संतकबीरनगर। जिले की विकास की नींव कही जाने वाली ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका पर्दाफाश ऑडिट रिपोर्ट ने कर दिया है। राज्य और केंद्रीय वित्त आयोग से गांवों के कायाकल्प के लिए आई 10.64 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि को ‘विकास’ की भेंट चढ़ाने के बजाय प्रधानों और सचिवों ने आपसी जुगलबंदी से अपनी जेबों में भर लिया। अब इस लूट-खसोट पर प्रशासन ने हंटर चलाने की तैयारी कर ली है।

💫जुगलबंदी में उड़ाए करोड़ों: ऑडिट में खुली पोल

ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। यह महज एक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित ‘गोलमाल’ है।

👉वर्ष 2021-22: करीब 9 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा गबन, जिसमें 48 प्रधान और सचिव निशाने पर हैं।

👉वर्ष 2022-23: 1.3 करोड़ रुपये की हेराफेरी में 44 प्रधान और सचिव दोषी।

👉वर्ष 2023-24: 34 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता में 42 जोड़ीदारों के नाम।

सेमरियावां ब्लॉक के मूड़ाडीहाखुर्द, सुजिया, बत्सी बत्सा और जगदीशपुर जैसी पंचायतों में लाखों रुपये बैंक खातों से ऐसे निकाले गए जैसे वह उनकी निजी जागीर हो। कहीं 4 लाख तो कहीं 2 लाख की निकासी बिना किसी ठोस साक्ष्य के की गई।

💫15 दिन की मोहलत, वरना ‘भू-राजस्व’ की तरह होगी वसूली

जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बहानेबाजी नहीं चलेगी। कुल 134 पूर्व व वर्तमान प्रधानों और 134 पंचायत सचिवों को नोटिस थमाया जा रहा है।

अल्टीमेटम: “15 दिन के भीतर साक्ष्यों के साथ जवाब दें, वरना गबन की गई पाई-पाई भू-राजस्व (Land Revenue) की तर्ज पर वसूल की जाएगी।”

प्रशासन के इस कड़े रुख से जिले के भ्रष्ट गलियारों में हड़कंप मच गया है। जो प्रधान और सचिव कल तक विकास की बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे, आज वे नोटिस और संभावित ‘रिकवरी’ के डर से साक्ष्य जुटाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

💫सवाल: क्या सिर्फ वसूली काफी है?

करोड़ों के इस घोटाले ने व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या जनता के टैक्स के पैसे को डकारने वालों पर केवल वसूली की कार्रवाई पर्याप्त है? क्या इन ‘सफेदपोश’ लुटेरों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई और जेल का प्रावधान नहीं होना चाहिए? जिले की जनता अब जवाब मांग रही है।

📍 सेमरियावां ब्लॉक का ‘विशेष’ कारनामा (नमूना)

ऑडिट में पकड़ी गई कुछ प्रमुख ग्राम पंचायतों की वित्तीय अनियमितता:

ग्राम पंचायत मूड़ाडीहाखुर्द: ₹2,58,617 का गबन।

ग्राम पंचायत सुजिया: ₹4,21,433 की अवैध निकासी।

ग्राम पंचायत बत्सी बत्सा: ₹1,31,125 का गोलमाल।

ग्राम पंचायत जगदीशपुर (लहुरादेवा): ₹52,600 की हेराफेरी।

⚠️ अल्टीमेटम: 15 दिन या ‘कुर्की’

प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि:

नोटिस: सभी 268 दोषियों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू।

जवाब: 15 दिनों के भीतर साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण अनिवार्य।

वसूली: संतोषजनक जवाब न मिलने पर ‘भू-राजस्व’ की भांति (आरसी काटकर) वसूली।

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