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संतरों की नगरी पर नशे का दाग, सुसनेर में फैलता ड्रग्स माफिया का जाल

सुसनेर। मध्यप्रदेश और राजस्थान की सीमा पर बसा सुसनेर क्षेत्र कभी संतरे की मिठास, शांत कस्बाई जीवन और व्यापारिक गतिविधियों के लिए जाना जाता था। लेकिन बीते कुछ वर्षों में इस इलाके की पहचान तेजी से बदल गई है। आज यह क्षेत्र “उड़ता पंजाब” की तर्ज पर मादक पदार्थों की तस्करी और निर्माण के बड़े केंद्र के रूप में कुख्यात हो चुका है। स्मैक, एमडी ड्रग्स और गांजे की आसान उपलब्धता ने युवा पीढ़ी को नशे की गर्त में धकेल दिया है, वहीं करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार ने पूरे सामाजिक ताने-बाने को हिलाकर रख दिया है।

पिछले कुछ महीनों में राजस्थान और मध्यप्रदेश की बाहरी एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाइयों में ड्रग्स के बड़े जखीरे बरामद हुए हैं। इन खुलासों से यह साफ हो गया है कि सुसनेर और आसपास का इलाका अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क का अहम ठिकाना बन चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन अधिकांश मामलों का पर्दाफाश बाहरी पुलिस और नारकोटिक्स विभाग ने किया, जबकि स्थानीय पुलिस की भूमिका लगभग नदारद रही।

बदलता तरीका, गहराता जाल

सुसनेर क्षेत्र में मादक पदार्थों का कारोबार अब पुराने तरीकों से आगे निकल चुका है। पहले जहां तस्कर बाहर से तैयार माल लाकर यहां खपाते थे, वहीं अब क्षेत्र में ही ड्रग्स निर्माण की गुप्त फैक्ट्रियां संचालित होने लगी हैं। तस्कर नर्सरी, फार्महाउस और सुनसान इलाकों की आड़ में लैब तैयार कर रहे हैं ताकि पुलिस और सैटेलाइट निगरानी से बचा जा सके। राजस्थान के झालावाड़, डग, भवानीमंडी और मध्यप्रदेश के इंदौर–उज्जैन की पुलिस के साथ नारकोटिक्स विभाग की टीमें लगातार यहां छापेमारी कर रही हैं। इन कार्रवाइयों में करोड़ों रुपये मूल्य के केमिकल, मशीनें और तैयार ड्रग्स बरामद हुए हैं। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस पर आरोप है कि वह वर्षों से चल रहे इस काले कारोबार को देखकर भी अनदेखा कर रही है।

युवाओं पर सबसे बड़ा संकट:-

क्षेत्र के युवाओं में स्मैक और एमडी की लत तेजी से फैल रही है। स्कूल–कॉलेज जाने वाले छात्र भी इसकी चपेट में आ रहे हैं, जो भविष्य के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। देर रात संदिग्ध लोगों की आवाजाही, मोहल्लों में खुलेआम नशे की पुड़िया बिकने की शिकायतें आम हो गई हैं। कई परिवारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके बच्चों की जिंदगी नशे ने तबाह कर दी, लेकिन शिकायत के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस केवल छोटे पेडलरों को पकड़कर खानापूर्ति कर देती है, जबकि असली सरगना खुलेआम घूम रहे हैं। यही कारण है कि सुसनेर का नाम अब ड्रग्स माफिया के सुरक्षित ठिकाने के रूप में लिया जाने लगा है।

50 करोड़ की एमडी का बड़ा खुलासा:-

हाल ही में सबसे बड़ा मामला तब सामने आया जब राजस्थान पुलिस की संयुक्त टीम ने 320 किलो 720 ग्राम संदिग्ध केमिकल 2-ब्रोमो-4-मिथाइल प्रोपीओफिनोन जब्त किया। जांच में खुलासा हुआ कि इससे लगभग 50 करोड़ रुपये मूल्य की एमडी ड्रग्स तैयार की जानी थी। यह केमिकल महाराष्ट्र से कोटा होते हुए आगर मालवा लाया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान आगर निवासी जय नारायण उर्फ मम्मू और उसका साथी रामलाल सहित कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उनकी निशानदेही पर राजगढ़ जिले के माचलपुर क्षेत्र में चल रही एक गुप्त ड्रग्स फैक्ट्री का भी भंडाफोड़ हुआ, जहां से मशीनें और बड़ी मात्रा में निर्माण सामग्री बरामद की गई।

पहला मामला:-  इंदौर तक पहुंची सुसनेर की कड़ी

8 जनवरी 2026 को इंदौर नारकोटिक्स विभाग ने राजकुमार ब्रिज क्षेत्र से सुसनेर निवासी शाकिर उर्फ बल्लू और अल्फेज खां को 35.80 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया। इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग 3.5 लाख रुपये आंकी गई। पूछताछ में खुलासा हुआ कि ड्रग्स की सप्लाई सीधे सुसनेर से हो रही थी और यह नेटवर्क बड़े शहरों तक फैला है।

दूसरा मामला: नर्सरी की आड़ में फैक्ट्री

10 जनवरी 2026 को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स ने आगर मालवा के ग्राम आमला में छापा मारकर 10 करोड़ रुपये मूल्य की ड्रग्स, केमिकल और मशीनें जब्त कीं। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि यह अवैध कारोबार एक नर्सरी की आड़ में चल रहा था। आमला, सुसनेर और नलखेड़ा के बीच का यह इलाका तस्करों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर बन चुका है।

स्थानीय पुलिस की कार्रवाई नाकाफी:-

17 जनवरी 2026 को सुसनेर पुलिस ने 20.60 ग्राम स्मैक के साथ राजा उर्फ सलीम और अरशद को गिरफ्तार किया। थाना प्रभारी केशर राजपूत के नेतृत्व में हुई यह कार्रवाई कागजों में बड़ी दिखी, लेकिन करोड़ों के अंतरराज्यीय नेटवर्क के सामने यह बेहद छोटी साबित हुई। नागरिकों का कहना है कि पुलिस केवल छोटे विक्रेताओं तक सीमित है, जबकि बड़े माफिया तक हाथ नहीं डालती। 

तस्करी का पैटर्न

नर्सरी और फार्महाउस की आड़ में लैब:-

 

सीमावर्ती रास्तों से माल की आवाजाही

युवाओं को पहले मुफ्त नशा, फिर ग्राहक बनाना

ऑनलाइन पेमेंट और कोड वर्ड का इस्तेमाल

बाहरी राज्यों से केमिकल की सप्लाई:-

समाज पर पड़ता असर

नशे के कारण परिवार टूट रहे हैं, अपराध बढ़ रहा है और नई पीढ़ी दिशाहीन हो रही है। कई गांवों में चोरी, मारपीट और घरेलू हिंसा के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो पूरा क्षेत्र बर्बादी की चपेट में आ जाएगा।

 

 

क्या कहते हैं जिम्मेदार:-

मादक पदार्थों को लेकर सूचना मिलते ही पुलिस कार्रवाई करती है। जिले में पूर्व में भी बड़ी कार्रवाई हुई है और सुसनेर क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है।

  1. विनोद कुमार सिंह, जिला पुलिस अधीक्षक, आगर मालवा 

वंदे भारत न्यूज से संवाददाता दीपक राठौर की रिपोर्ट,,

7415389901

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