

++++++++++++++++++++++++++++++ सोमवार 08 सितंबर 2025-: भारत के उच्चतम न्यायालय ने आज सोमवार को एसआईआर-वोटर वेरिफिकेशन के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग को यह आदेश दिया कि आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज के रूप में स्वीकार करना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने अपने दिए गए आदेश मे कहा कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं हो सकता है, किन्तु नियमावली में आधार को चुनावी प्रक्रिया के दस्तावेजों में शामिल किया गया है। ऐसे हालात में चुनाव आयोग को बारहवें दस्तावेज के रूप में आधार को स्वीकार करना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि आधार कार्ड को लेकर यदि किसी तरह की कोई शंका चुनाव आयोग हो तो इसकी जांच कराए जाए। उच्चतम के न्यायाधीश महोदय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट या जन्म प्रमाणपत्र के अतिरिक्त 11 दस्तावेजों मे से किसी अन्य दस्तावेज को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में वकील कपील सिब्बल ने यह प्रस्ताव रखा कि आधार कार्ड को 12वां किया दस्तावेज घोषित किया जाए। इस पर न्यायाधीश महोदय ने कहा -आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है परन्तु जन प्रतिनिधित्व कानून के अंतर्गत इसे पहचान प्रमाण पत्र के रूप में मान्यता दी जा सकती है।










