उत्तर प्रदेशबस्तीबाराबंकीलखनऊसिद्धार्थनगर 

।। यूपी में टले पंचायत चुनाव; अब 2027 विधानसभा चुनाव के बाद ही पड़ेंगे वोट?

।। जनगणना ड्यूटी और विधानसभा की तैयारी: यूपी में फिलहाल नहीं होगी 'गांव की सरकार' की जंग।।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। यूपी में पंचायत चुनाव टलना लगभग तय: अब 2027 विधानसभा चुनाव के बाद ही होगी वोटिंग।।

रविवार 25 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का इंतज़ार कर रहे उम्मीदवारों और ग्रामीणों के लिए बड़ी खबर है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में पंचायत चुनाव अब अप्रैल-मई में होने की संभावना लगभग खत्म हो गई है। माना जा रहा है कि अब ये चुनाव वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के संपन्न होने के बाद ही कराए जाएंगे।

💫जनगणना-2027 बना मुख्य कारण

इस देरी का सबसे बड़ा तकनीकी कारण आगामी जनगणना-2027 है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के कार्यालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार:

⭐1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक प्रदेश में ‘हाउस लिस्टिंग’ (मकानों की सूची) का कार्य चलेगा।

इस कार्य में यूपी के 75 जिलों के लगभग 50 से 60 हजार शिक्षक, शिक्षा मित्र, लेखपाल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहेंगे।

चूंकि चुनाव और जनगणना दोनों के लिए भारी संख्या में सरकारी अमले की आवश्यकता होती है, इसलिए एक ही समय पर दोनों कार्य कराना प्रशासनिक रूप से संभव नहीं दिख रहा।

💫राजनीतिक जोखिम से बच रही है सरकार

प्रशासनिक कारणों के अलावा, इसके पीछे गहरे राजनीतिक मायने भी देखे जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो सत्ता पक्ष और विपक्षी दल फिलहाल पंचायत चुनाव के पक्ष में नहीं हैं:

⭐भीतरी गुटबाजी का डर: पंचायत चुनाव में अक्सर एक ही पार्टी के कई कार्यकर्ता आमने-सामने होते हैं, जिससे विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी के भीतर कड़वाहट बढ़ने का खतरा रहता है।

⭐टिकट का विवाद: टिकट न मिलने पर कार्यकर्ता दूसरे दलों का रुख कर सकते हैं, जिससे मुख्य चुनाव (2027) में पार्टी का समीकरण बिगड़ सकता है।

⭐2021 का अनुभव: पिछले पंचायत चुनावों के कड़वे अनुभवों और उनसे हुए नुकसान को देखते हुए सरकार इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।

💫आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया भी ठप

चुनाव टलने का एक और संकेत यह है कि अभी तक आरक्षण निर्धारण के लिए आवश्यक कमेटी का गठन भी नहीं किया गया है। पंचायती राज विभाग को वर्ष 2021 और 2015 के आधार पर आरक्षण तय करना है, जिसमें कम से कम दो महीने का समय लगता है, लेकिन फिलहाल जमीनी स्तर पर इसकी कोई तैयारी नहीं दिख रही है।

निष्कर्ष: वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए स्पष्ट है कि सरकार और निर्वाचन आयोग का पूरा ध्यान फिलहाल डिजिटल जनगणना और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनाव पर है। ऐसे में ‘गांव की सरकार’ चुनने के लिए जनता को अभी लंबा इंतज़ार करना पड़ सकता है।

Back to top button
error: Content is protected !!