
योगी सरकार का स्वास्थ्य विभाग पर बड़ा हंटर: 17 डॉक्टर बर्खास्त, लापरवाही पर गिरी गाज
लखनऊ | विशेष संवाददाता
17 चिकित्साधिकारियों द्वारा लंबे समय से अपने चिकित्सकीय उत्तरदायित्व से विरत रहने एवं चिकित्सकीय ड्यूटी से लगातार अनुपस्थित रहने का संज्ञान लेते हुए मेरे द्वारा उक्त चिकित्साधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किए जाने के निर्देश दिए गए हैं –
1. चिकित्साधिकारी, प्रा०स्वा०केंद्र बनिपारा, कानपुर।
2. चिकित्साधिकारी, अधीन सी०एम०ओ०, बरेली
3. चिकित्साधिकारी, सामु०स्वा० केंद्र, अजीत मल्ल, औरैया
4. चिकित्साधिकारी, सामु०स्वा० केंद्र, अजीत मल्ल, औरैया
5. चिकित्साधिकारी, एम०बी०एस०, राजकीय चिकित्सालय, भदोही
6. स्त्री रोग विशेषज्ञ, अधीन सी०एम०ओ०, बरेली
7. चिकित्साधिकारी, प्रा०स्वा० केंद्र घसारी अछल्दा, औरैया
8. . चिकित्साधिकारी, प्रा०स्वा० केंद्र, गूरा बिधूना, औरैया
9. . चिकित्साधिकारी, सामु०स्वा० केंद्र, सैदाबाद, प्रयागराज
10. . चिकित्साधिकारी, प्रा०स्वा० केंद्र, कैलाशपुर, सहारनपुर
11. . चिकित्साधिकारी, सामु०स्वा० केंद्र, जवां अलीगढ़
12. . चिकित्साधिकारी, सामु०स्वा० केंद्र, रामनगर, प्रयागराज
13. . चिकित्साधिकारी, प्रा०स्वा० केंद्र, बबीना झांसी
14. . चिकित्साधिकारी, सामु०स्वा० केंद्र, जैदपुर, बाराबंकी
15. . चिकित्साधिकारी, सामु०स्वा० केंद्र, जयसिंहपुर, सुल्तानपुर
16. . चिकित्साधिकारी, प्रा०स्वा० केंद्र, अखंडनगर, सुल्तानपुर
17. . चिकित्साधिकारी, सामु०स्वा० केंद्र, मीरगंज, बरेली mi
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य सेवाओं में कोताही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। डिप्टी सीएम के निर्देश पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात 17 लापरवाह चिकित्साधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। इसके साथ ही कई अन्य डॉक्टरों के खिलाफ वेतन वृद्धि रोकने और विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
ड्यूटी से गायब रहने वालों पर कठोर प्रहार
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, बर्खास्त किए गए अधिकांश चिकित्साधिकारी लंबे समय से अपनी ड्यूटी से अनाधिकृत रूप से गायब चल रहे थे। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया है कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ और अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मरीजों से अभद्रता और लापरवाही पर भी एक्शन
केवल अनुपस्थिति ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक पक्ष पर भी सरकार ने सख्ती दिखाई है:
मरीजों से अभद्रता: मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले 4 चिकित्साधिकारियों के विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।
स्थानांतरण की अनदेखी: तबादला होने के बाद भी नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण न करने वाले डॉ. गजेंद्र सिंह के विरुद्ध सख्त विभागीय कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।
बीकेटी ट्रामा सेंटर: लखनऊ के बीकेटी ट्रामा सेंटर में तैनात 4 डॉक्टरों से लापरवाही के मामले में स्पष्टीकरण (Show-cause notice) मांगा गया है।
भ्रष्टाचार और नीति उल्लंघन पर आर्थिक दंड
डिप्टी सीएम ने आर्थिक अनियमितताओं पर भी कड़ा प्रहार किया है:
दवा खरीद में धांधली: सरकारी क्रय नीति के विरुद्ध जाकर दवाएं खरीदने वाले 2 डॉक्टरों की पेंशन में 10 फीसदी की कटौती करने का निर्णय लिया गया है।
वेतन वृद्धि पर रोक: कार्य में शिथिलता और उच्चादेशों की अवहेलना करने पर 5 डॉक्टरों की वेतन वृद्धि (Increment) रोकते हुए उन्हें ‘परनिंदा दंड’ दिया गया है। वहीं, 3 अन्य डॉक्टरों को भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी जारी की गई है।
“प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था आम जनमानस के लिए है। जो डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे या मरीजों के साथ गलत व्यवहार करेंगे, उनके लिए विभाग में कोई जगह नहीं है। यह कार्रवाई एक संदेश है कि काम में ईमानदारी अनिवार्य है।”
— ब्रजेश पाठक, उपमुख्य
मंत्री (यूपी)




















