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*रामचंडी महाविद्यालय सरायपाली में मनाई गई वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ*

*रामचंडी महाविद्यालय सरायपाली में मनाई गई वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ*

*रामचंडी महाविद्यालय सरायपाली में मनाई गई वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ*

तिलक राम पटेल संपादक महासमुन्द वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज चैनल समृद्ध भारत अखबार

रामचंडी महाविद्यालय सरायपाली में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वाधान में मनाई गई वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री धर्मेंद्र चौधरी भूतपूर्व सैनिक (फुलझर डिफेंस अकादमी के संचालक), विशिष्ट अतिथि ग्राम पंचायत प्रेतनडीह के सरपंच श्री दीपक ओंगरे, महाविद्यालय के संचालक श्री सुभाष चंद्र साहू जी, उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ एन के भोई जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज से डेढ़ शताब्दी पूर्व जब बंकिम बाबू ने यह गीत लिखा, तो शायद उन्हें भी आभास नहीं रहा होगा कि वे भारत के पुनरुत्थान की पटकथा लिख रहे हैं। 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में जब गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे स्वर दिया, तो पूरे देश में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। अंग्रेजों को इस गीत से इतना डर लगने लगा था कि उन्होंने इस पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन क्या विचारों को कभी कैद किया जा सकता है? ‘वन्दे मातरम्’ जेल की कोठरियों से लेकर फांसी के फंदों तक गूंजने लगा। सहायक प्राध्यापक आर एस मांझी ने कहा कि आज 150वीं वर्षगांठ मनाते समय हमारा कर्तव्य केवल इस गीत को दोहराना नहीं है, बल्कि इसके भाव को जीना है। आज ‘वन्दे मातरम्’ का अर्थ है— भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा होना, स्वच्छता को अपनाना और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को सिद्ध करना।

वंदे मातरम् के संदेश का वाचन बी एड के छात्राध्यापक मानस कुमार प्रधान ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र छात्राओं ने सामूहिक वंदे मातरम् गीत का गायन किया।

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