
वंदेभारतलाइवटीव न्युज, सोमवार 16 मार्च 2026
।। सभी माताओं बहनों भाईयों को चैन वासंतीय नवरात्र, हिन्दू नववर्ष एवं श्रीरामनवमी की हार्दिक बधाई शुभकामनाऐं =।। ‘ ==================
देवी दुर्गा माता पूजा आराधना का पर्व चैन वासंतीय नवरात्रि की शुरुआत इस बार 19 मार्च गुरूवार के दिन से हो रहा है। 
चैत्र मास नवरात्रि के साथ ही हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ भी हो जायेगा। जानकारी के अनुसार इस बार हिन्दी वर्ष 12 महिने के जगह पर 13 महिनों का रहेगा, हिन्दी वर्ष विक्रम संवत 2083 में एक अधिक मास पड़ रहा है ज्योतिषाचार्यों के अनुसार चैत्र मास नवरात्रि और अश्विन मास नवरात्रि में भक्तगण देवी दुर्गा माता के नौ स्वरूपों की पूजा आराधना किया करते हैं। माघ मास और आषाढ मास गुप्त नवरात्रि पर देवी सती की दस महाविद्याओं की साधना करते हैं। वर्ष मे चार नवरात्रि आती हैं जिसमे दो गुप्त नवरात्रि और दो प्रकट नवरात्रि होती हैं। पंचांग के अनुसार इस बार चैत्र मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा की तिथि गुरूवार 19 मार्च 2026 सुबह 06:52 मिनट पर शुरू हो रही है और शुक्रवार 20 मार्च को सुबह 04:52बजे प्रतिपदा तिथि समाप्त होगी। जिससे चैत्र वासंतीय नवरात्रि 19 मार्च गुरूवार को मानी जा रही है। यह नवरात्रि नौ दिनों तक 27 मार्च 2026 शुक्रवार तक चलेगी। 27 मार्च 2026 शुक्रवार को श्री रामनवमी के साथ चैत्र नवरात्रि संपन्न हो जायेगी। नवरात्रि के प्रथम दिन प्रतिपदा तिथि पर घरों और मन्दिरों मे घटस्थापना की जाती है। कलश को देवी दुर्गा माता का प्रतीक माना जाता है घटस्थापना के साथ ही देवी की नौ दिनों की पूजा आराधना शुरू हो जाती है । भक्तगण नवरात्रि के दौरान व्रत उपवास रखते हैं और सुबह शाम देवी मां की पूजा आरती करते हैं। इस दौरान मंत्रो का जाप धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते हैं नवरात्रि के प्रथम दिन देवी मां शैलपुत्री की पूजा आराधना की जाती है। शैलपुत्री को स्थिरता शक्ति का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। देवी ब्रह्मचारिणी तप आत्म संयम की प्रेरणा देती हैं। नवरात्र के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा आराधना की जाती है, देवी चंद्रघंटा की पूजा से भय दूर होकर साहस की प्राप्ति होती है नवरात्र के चौंथे दिन देवी कूष्मांडा की पूजा भक्ति की जाती है, कूष्मांडा देवी की आराधना से ज्ञान समृद्धि प्राप्त होती है। नवरात्र के पांचवें दिन देवी मां स्कंदमाता की पूजा भक्ति की जाती है, स्कंदमाता की पूजा से संतान सुख का आशिर्वाद प्राप्त होता है। नवरात्र के छठवें दिन देवी कात्यायनी की पूजा आराधना की जाती है, कात्यायनी देवी की आराधना से विवाह से संबंधित बाधाएं दूर होती हैं नवरात्र के सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा वंदना की जाती है, देवी कालरात्रि की आराधना से नकरात्मक शक्तियों से रक्षा होती है नवरात्र के आठवें दिन महाष्टमी पर देवी महागौरी की पूजा आराधना की जाती है, महागौरी की पूजा वंदना से मानव जीवन में पवित्रता शांति आती है। नवरात्र के अंतिम दिन महानवमी पर देवी सिद्धदात्री की पूजा वंदना आराधना की जाती है, देवी सिद्धदात्री की पूजा से सिद्धि सफलता पूर्णता का आशिर्वाद प्राप्त होता है। चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी को प्रभू श्रीरामचंद्र जी का प्राकट्य उत्सव श्रीराम नवमी भी मनाया जाता है । इस वर्ष 2026 में 17 मई से लेकर 15 जून तक ज्येष्ठ मास का अधिकमास भी रहेगा। इस बार ज्येष्ठ मास दो महिनों का रहेगा। इस कारण विक्रम संवत 2083 तेरह महिनों का होगा। विक्रम संवत्सर 2083 का नाम रौद्र है। बृहस्पति ग्रह राजा और मंगल ग्रह मंत्री हैं। अधिकमास को पुरूषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह मास भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा आराधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इस समय पर जप तप ध्यान, दान धर्म, तीर्थ यात्रा, आदि उत्तम रहता है। अधिकमास में विवाह गृह प्रवेश, नया व्यापार आदि के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते हैं।


