
अजीत मिश्रा (खोजी)
🏫बस्ती मंडल: फर्जीवाड़े की नींव पर खड़ा ‘सेंट जोसेफ स्कूल’, 10 करोड़ की ‘वसूली’ और कागजी मान्यता का खेल!🏫
⭐बिना रजिस्ट्रेशन, बिना नक्शा: सेंट जोसेफ स्कूल के ‘काले साम्राज्य’ पर जाँच की आँच!
⭐सेंट जोसेफ स्कूल: न सोसायटी का पता, न जमीन का ठिकाना; फिर भी धड़ल्ले से चल रहा वसूली का धंधा!
⭐बड़ा फर्जीवाड़ा: 55 में से 27 शिक्षक ही बीएड पास, नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़।
⭐BDA को ठेंगा: बिना नक्शा पास कराए खड़ी कर दी गगनचुंबी इमारत।
⭐हड़कंप: शिकायतकर्ता अजय के आरोपों ने उड़ाई स्कूल प्रबंधन की नींद।
⭐जांच शुरू: BSA ने बनाई कमेटी, क्या गिरेगी भ्रष्टाचार की ये ऊंची दीवार?
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
बस्ती। शिक्षा के मंदिर जब भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बन जाएं, तो नौनिहालों का भविष्य अंधकार में डूबना तय है। बस्ती मंडल में एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां ‘सेंट जोसेफ स्कूल’ के रसूख और फर्जीवाड़े की ऊंची इमारत अब शासन की रडार पर है। शिकायतों के पुलिंदे ने स्कूल प्रबंधन की उन फाइलों को खोल कर रख दिया है, जिन्हें अब तक रसूख की धूल से ढका गया था।
🔔सोसायटी गायब, फिर भी ‘मान्यता’ का चमत्कार!
जांच की आंच में सबसे बड़ा खुलासा सेंट जोसेफ एजुकेशनल सोसायटी को लेकर हुआ है। विभागीय फाइलों में इस सोसायटी के रजिस्ट्रेशन का कहीं अता-पता नहीं है। नियम कहते हैं कि बिना सोसायटी के रिन्यूअल के स्कूल का संचालन अवैध है, लेकिन यहाँ तो ‘अंधेर नगरी’ वाला हाल है। बिना वैध रजिस्ट्रेशन के न सिर्फ स्कूल को मान्यता मिली, बल्कि फर्जी प्रबंधकीय कमेटी बनाकर सालों से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
🔔जमीन का पता नहीं, नक्शा भी गायब: BDA को ठेंगा?
हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन पर स्कूल की विशाल इमारत खड़ी है, वह जमीन रिकॉर्ड में सोसायटी के नाम दर्ज ही नहीं है। सवाल यह है कि बिना मालिकाना हक के शिक्षा विभाग ने मान्यता की मुहर कैसे लगा दी? इतना ही नहीं, बस्ती विकास प्राधिकरण (BDA) की नाक के नीचे बिना नक्शा पास कराए ईंट पर ईंट रखकर अवैध साम्राज्य खड़ा कर लिया गया, और विभाग कुंभकर्णी नींद सोता रहा।
🔔शिक्षण की गुणवत्ता: आधी हकीकत, आधा फसाना
स्कूल की चमक-धमक के पीछे शिक्षकों की योग्यता का काला सच भी डराने वाला है। मानकों को ताक पर रखकर रखे गए 55 शिक्षकों में से केवल 27 के पास ही बीएड (B.Ed) की डिग्री है। यानी आधे से ज्यादा शिक्षक मानकों के अनुसार पढ़ाने के योग्य ही नहीं हैं। क्या यही वह ‘क्वालिटी एजुकेशन’ है जिसके नाम पर अभिभावकों की जेब काटी जा रही है?
🔔5 साल में 10 करोड़ की ‘लूट’
शिकायतकर्ता अजय के गंभीर आरोपों के मुताबिक, फर्जी मान्यता के दम पर इस स्कूल ने पिछले 5 वर्षों में लगभग 10 करोड़ रुपये की मोटी रकम अभिभावकों से वसूली है। यह महज फीस नहीं, बल्कि शिक्षा के नाम पर किया गया एक संगठित आर्थिक अपराध है।
🔔जांच शुरू, रसूखदारों में हड़कंप
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए शासन ने कड़े रुख के साथ जांच के निर्देश दिए हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने भी आनन-फानन में एक जांच कमेटी गठित कर दी है। जैसे ही जांच की खबर फैली, स्कूल प्रबंधन और उनसे जुड़े सफेदपोशों में हड़कंप मच गया है।
🔥बड़ा सवाल: क्या जांच कमेटी इन रसूखदारों पर कानूनी शिकंजा कसेगी या फिर लिपापोती कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? बस्ती की जनता की नजरें अब जांच के नतीजों पर टिकी हैं।
मंडल ब्यूरो प्रमुख




















