
*राष्ट्रीय लोक आंदोलन की कार्यकारिणी अध्यक्ष कल्पना इनामदार ने उठाई महंगाई और वैश्विक तनाव पर आवाज
आगरा।देश इस समय एक अत्यंत संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव केवल कूटनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा असर भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे समय में भारत की भूमिका एक संतुलित और विश्वसनीय मध्यस्थ (Mediator) के रूप में उभरकर सामने आ सकती है।
इन्हीं गंभीर मुद्दों को लेकर 7 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस प्रेस वार्ता में Rashtriya Lok Aandolan की ओर से कार्यकारिणी अध्यक्ष Kalpana Inamdar ने देश और आम जनता से जुड़े कई अहम मुद्दों को उठाया। यह संगठन वरिष्ठ समाजसेवी Anna Hazare के नेतृत्व में कार्य कर रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कल्पना इनामदार ने कहा कि भारत के ईरान, इजरायल और अमेरिका तीनों देशों के साथ संतुलित संबंध हैं, जो उसे वैश्विक शांति के लिए एक मजबूत मध्यस्थ बना सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को आगे आकर संवाद का एक निष्पक्ष मंच तैयार करना चाहिए और संबंधित देशों के बीच बातचीत को बढ़ावा देना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वैश्विक तनाव का सीधा असर भारत के आम नागरिकों पर पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई, विशेष रूप से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि ने आम लोगों का जीवन कठिन बना दिया है। एक आम आदमी, जो दिन-रात मेहनत करता है, आज अपने परिवार का पालन-पोषण करने में संघर्ष कर रहा है।
कल्पना इनामदार ने सवाल उठाया कि जब एक नागरिक महंगाई के बोझ से दबा हुआ है, तब सरकार की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए—जनता को राहत देना या कर के माध्यम से राजस्व बढ़ाना? उन्होंने कहा कि आज एक युद्ध सीमाओं पर नहीं, बल्कि हर घर में महंगाई के रूप में लड़ा जा रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 40% से 50% हिस्सा टैक्स (Excise + VAT) का होता है। इस कारण महंगाई केवल बाजार की स्थिति नहीं, बल्कि नीतिगत निर्णयों का भी परिणाम है। यदि सरकार चाहे, तो इन करों में कमी करके आम जनता को बड़ी राहत दे सकती है।
महंगाई का असर समाज के हर वर्ग पर पड़ रहा है। मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों के भविष्य के लिए बचत नहीं कर पा रहे हैं, जबकि गरीब परिवार दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह स्थिति केवल आर्थिक संकट नहीं, बल्कि एक मानवीय संकट का रूप ले चुकी है।
रसोई गैस (LPG) की बढ़ती कीमतों के कारण कई घरों में फिर से पारंपरिक चूल्हों का उपयोग शुरू हो गया है, जो विकास के विपरीत एक चिंताजनक संकेत है। शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र भी इस महंगाई से प्रभावित हो रहे हैं।
इस दौरान Kalpana Inamdar ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे इस गंभीर परिस्थिति को समझते हुए त्वरित, ठोस और जनहित में निर्णय लें, ताकि देश के नागरिकों को राहत मिल सके और भारत वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।
*प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखी गई मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:*
1. भारत को तटस्थ और सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका अपनानी चाहिए।
2. वैश्विक संघर्ष को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज किए जाएं।
3. पेट्रोल-डीजल पर लगाए गए कर (Excise + VAT) तुरंत कम किए जाएं।
4. रसोई गैस (LPG) पर सब्सिडी को पुनः लागू किया जाए।
5. केंद्र और राज्य सरकार मिलकर महंगाई नियंत्रण के लिए संयुक्त नीति बनाएं।
अंत में, यह प्रेस कॉन्फ्रेंस इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश में बढ़ती महंगाई और वैश्विक तनाव को लेकर नागरिक समाज में गहरी चिंता है। Rashtriya Lok Aandolan की ओर से Kalpana Inamdar द्वारा उठाई गई ये मांगें न केवल आम जनता की आवाज हैं, बल्कि सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी हैं कि अब समय आ गया है जब जनहित को सर्वोपरि रखते हुए ठोस कदम उठाए जाएं।
यदि सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार करती है, तो न केवल देश के नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि भारत एक मजबूत और जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में भी उभरकर सामने आएगा।











