

बलौदाबाजार।
बहुचर्चित निक्कू सलूजा हत्याकांड की 9वीं बरसी एक बार फिर न्याय व्यवस्था की धीमी रफ्तार पर सवाल खड़े कर गई। गुरुवार को गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में पीड़ित परिवार और सिख समाज ने अरदास कर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी, लेकिन इस श्रद्धांजलि के पीछे 9 वर्षों का दर्द, इंतज़ार और टूटती उम्मीदें साफ झलक रही थीं।
अरदास के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिवार की पीड़ा शब्दों में बयां हुई। परिजनों ने कहा—“हम हर पेशी में सुबह से शाम तक कोर्ट में बैठते हैं, हस्ताक्षर करते हैं और फिर खाली हाथ लौट आते हैं। 9 साल हो गए, लेकिन इंसाफ अब भी अधूरा है। आखिर कब तक ‘तारीख पर तारीख’ मिलती रहेगी?”
कस्टडी में मौत, लेकिन न्याय अब भी अधूरा
9 अप्रैल 2017 को एक सामान्य ट्रैफिक विवाद ने भयावह मोड़ ले लिया था। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद निक्कू सलूजा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस पर मारपीट का गंभीर आरोप लगाया था, जिसके बाद पूरे शहर में आक्रोश फूट पड़ा—चक्काजाम, विरोध प्रदर्शन और मौन रैलियों ने इस घटना को जनआंदोलन बना दिया।
प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर हत्या का मामला दर्ज किया, लेकिन 9 साल बाद भी न्यायिक प्रक्रिया अंतिम पड़ाव तक नहीं पहुंच सकी।
“आरोपी ड्यूटी पर, हम दर्द में”—परिवार
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे गंभीर आरोप यह सामने आया कि मामले के सभी आरोपी पुलिसकर्मी जमानत पर बाहर हैं और पुनः अपनी ड्यूटी कर रहे हैं।
वहीं, पीड़ित परिवार आज भी मानसिक, सामाजिक और आर्थिक पीड़ा झेल रहा है।
मृतक की पुत्री काजल की आवाज़ में आक्रोश और बेबसी साफ थी—
“मेरे पिता के हत्यारे खुलेआम घूम रहे हैं। हमारी सिर्फ एक मांग है—उन्हें जल्द से जल्द सख्त सजा मिले।”
मदुरै फैसले से उम्मीद, यहां भी वैसी सख्ती की मांग
परिवार और सिख समाज ने तमिलनाडु के मदुरै कोर्ट द्वारा कस्टोडियल डेथ के मामले में दोषी पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड दिए जाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कड़े फैसले न्याय व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करते हैं और बलौदाबाजार में भी इसी तरह त्वरित और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
एकजुट समाज, एक ही मांग—फास्ट ट्रैक में हो सुनवाई
इस अवसर पर दविंदर कौर, सुनीता कौर, काजल, सोनम, सुजल सिंह सहित परिवारजन और सिख समाज के अनेक लोग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में मांग रखी कि इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर शीघ्र न्याय सुनिश्चित किया जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
न्याय की धीमी रफ्तार पर बड़ा सवाल
निक्कू सलूजा हत्याकांड अब सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि उस सिस्टम का आईना बन चुका है जहां पीड़ित न्याय के लिए सालों तक भटकते रहते हैं।
9 साल का लंबा इंतजार… हर तारीख पर टूटती उम्मीद… और इंसाफ अब भी दूर।







