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वाराणसी:काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारियों ने नियमितीकरण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. इस दौरान कर्मचारियों ने एमपी थिएटर ग्राउंड से सेंट्रल ऑफिस तक जुलूस निकाला. इस दौरान सैकड़ों कर्मचारी मौजूद रहे. प्रदर्शनकारियों ने कनिष्ठ परीक्षा भर्ती रोकने की मांग की है. उनका कहना है कि पहले हम लोगों को नियमित करें, इसके बाद परीक्षा कराएं. अगर ऐसा नहीं होता है तो हम लोग इसका विरोध करेंगे. कर्मचारियों का साफ कहना है कि 3 हजार पदों के लिए वैकेंसी निकाली गई है, जबकि 1300 कर्मचारी डेली वेज या संविदा पर हैं, तो पहले हमें नियमित किया जाना चाहिए.

वाराणसी:काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारियों ने नियमितीकरण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. इस दौरान कर्मचारियों ने एमपी थिएटर ग्राउंड से सेंट्रल ऑफिस तक जुलूस निकाला. इस दौरान सैकड़ों कर्मचारी मौजूद रहे. प्रदर्शनकारियों ने कनिष्ठ परीक्षा भर्ती रोकने की मांग की है. उनका कहना है कि पहले हम लोगों को नियमित करें, इसके बाद परीक्षा कराएं. अगर ऐसा नहीं होता है तो हम लोग इसका विरोध करेंगे. कर्मचारियों का साफ कहना है कि 3 हजार पदों के लिए वैकेंसी निकाली गई है, जबकि 1300 कर्मचारी डेली वेज या संविदा पर हैं, तो पहले हमें नियमित किया जाना चाहिए.

वाराणसी:काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारियों ने नियमितीकरण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. इस दौरान कर्मचारियों ने एमपी थिएटर ग्राउंड से सेंट्रल ऑफिस तक जुलूस निकाला. इस दौरान सैकड़ों कर्मचारी मौजूद रहे.

 

प्रदर्शनकारियों ने कनिष्ठ परीक्षा भर्ती रोकने की मांग की है. उनका कहना है कि पहले हम लोगों को नियमित करें, इसके बाद परीक्षा कराएं. अगर ऐसा नहीं होता है तो हम लोग इसका विरोध करेंगे.

 

कर्मचारियों का साफ कहना है कि 3 हजार पदों के लिए वैकेंसी निकाली गई है, जबकि 1300 कर्मचारी डेली वेज या संविदा पर हैं, तो पहले हमें नियमित किया जाना चाहिए.संविदाकर्मी कंचन लता राय ने बताया कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय में 1300 संविदा और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी हैं. हमारी मांग है कि हमें नियमित किया जाए. हम लोग पिछले कई सालों से मांग कर रहे है. हम लोगों की सुनवाई नहीं हो रही है.इसके लिए कमेटी बनाई गई है, जबकि अभी तक उसका कोई फैसला नहीं आया है. कर्मचारियों ने बताया कि नियमितीकरण को लेकर पिछले कई सालों से वार्ता कर रहे है. हर बार देखने की बात कहकर टाल दिया जाता है.

 

पिछ्ले कई सालों से हमारे पद पर ही वैकेंसी निकाली जाती है, जबकि हम लोगों को नियमित नहीं किया जा रहा है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने मार्च 2026 में समिति का गठन किया है. कर्मचारियों ने कहा कि समिति का जब तक अंतिम निर्णय नहीं आ जाता है, तब तक नई भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं किया जाएंकर्मचारियों के तृतीय श्रेणी के कनिष्ठ लिपिक के 199 पदों पर भर्ती निकाली गई है. इसकी लिखित परीक्षा अप्रैल के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित है. उनका कहना है कि यदि समिति के निर्णय से पहले भर्ती कर ली गई, तो इससे वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों के हित प्रभावित हो सकते हैं.

 

प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने बताया कि कई लोग 30-40 वर्षों से विश्वविद्यालय में सेवा दे रहे हैं. वर्तमान में कार्यरत अधिकांश कर्मचारी 14 वर्षों से अधिक समय से काम कर रहे हैं. ऐसे में उनके लिए नियमित प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों से प्रतिस्पर्धा करना कठिन है..

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