बलौदा बाजार जिले की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर शासन-प्रशासन गहरी नींद में–भुनेश्वर सिंह डहरिया

जिला अस्पताल में जनरल सर्जन सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, मरीजों को निजी अस्पतालों का लेना पड़ रहा सहारा
बलौदाबाजार
बलौदा बाजार–भाटापारा जिले में लगातार सामने आ रही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष भुनेश्वर सिंह डहरिया ने शासन-प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिले की जनता बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा के लिए परेशान है। शासकीय अस्पतालों में आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में जनरल सर्जन सहित विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी
भुनेश्वर सिंह डहरिया ने कहा कि जिला अस्पताल में जनरल सर्जन सहित विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। गंभीर बीमारी या ऑपरेशन की आवश्यकता वाले मरीजों को कई बार दूसरे शहरों अथवा निजी अस्पतालों में जाने की मजबूरी होती है। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं से भी यह स्पष्ट है कि जिले में चिकित्सा विशेषज्ञों तथा विभिन्न स्वास्थ्य पदों की पूर्ति के लिए समय-समय पर भर्ती एवं वॉक-इन प्रक्रिया संचालित करनी पड़ रही है। वर्ष 2026 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत नर्सिंग ऑफिसर, ICU, ट्रॉमा एवं इमरजेंसी, SNCU सहित कई पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया भी प्रकाशित हुई है।
आयुष्मान योजना के नाम पर अतिरिक्त राशि लेने की शिकायतों की हो जांच
जिलाध्यक्ष ने कहा कि शासकीय अस्पतालों में पर्याप्त उपचार नहीं मिलने के कारण गरीब, मजदूर और किसान परिवार निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर होते हैं। वहीं कुछ निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड से निशुल्क इलाज का भरोसा देने के बाद मरीजों से अतिरिक्त राशि लिए जाने की शिकायतें जनता की ओर से सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि यदि आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध किसी अस्पताल में कैशलेस सेवा के लिए मरीज से अतिरिक्त भुगतान मांगा जाता है, तो यह गंभीर शिकायत है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की शिकायत व्यवस्था में भी सूचीबद्ध अस्पताल द्वारा कैशलेस सेवाओं के लिए भुगतान मांगने जैसी शिकायतों के लिए शिकायत दर्ज कराने का प्रावधान है।
उन्होंने शासन-प्रशासन से पूछा कि—
जिले में कुल कितने निजी अस्पताल पंजीकृत हैं?
इनमें से कितने अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध हैं?
पिछले वर्षों में कितने निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया गया?
आयुष्मान योजना में अनियमितता की कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं?
शिकायतों पर कितने अस्पतालों के विरुद्ध कार्रवाई की गई?
कितने मामलों में शिकायत मिलने के बावजूद अभी तक कार्रवाई नहीं हुई?
मरीजों से आयुष्मान योजना के अतिरिक्त राशि लेने की शिकायतों की जांच के लिए क्या व्यवस्था है?
गरीब परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ क्यों?
भुनेश्वर सिंह डहरिया ने कहा कि बीमारी के समय गरीब परिवार पहले ही मानसिक और आर्थिक संकट से गुजरता है। यदि इलाज के लिए उन्हें खेती-बाड़ी गिरवी रखने, कर्ज लेने या महिलाओं के गहने गिरवी रखने अथवा बेचने की नौबत आती है, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर समस्या है।
उन्होंने मांग की कि आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध सभी निजी अस्पतालों की नियमित जांच एवं निरीक्षण किया जाए और शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही तय हो
आप जिलाध्यक्ष ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने 7 सितंबर 2026 को प्रदेशव्यापी शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था के मुद्दे पर आंदोलन किया था। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जनता की शिकायतों को लगातार उठाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में चल रही व्यवस्थाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और जिला अस्पताल की सेवाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा होनी चाहिए। जिले के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों को लेकर भी प्रशासन को जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
आम आदमी पार्टी सड़क पर उतरने को तैयार
भुनेश्वर सिंह डहरिया ने कहा कि जिला अस्पताल में जनरल सर्जन एवं अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, शासकीय अस्पतालों में आवश्यक सुविधाओं की कमी तथा निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के नाम पर कथित अतिरिक्त वसूली जैसे मुद्दों पर शासन-प्रशासन तत्काल संज्ञान ले।
उन्होंने कहा कि यदि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और गरीब, मजदूर एवं किसान परिवारों को इलाज के लिए इसी तरह भटकना पड़ा, तो आम आदमी पार्टी जनता की आवाज को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी।
“स्वास्थ्य सेवा किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। गरीब परिवार को सम्मान के साथ समय पर और बेहतर इलाज मिले, यह शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी रहनी होगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि खबर की प्रकाशन के बाद शासन प्रशासन किस तरह से संज्ञान लेती है..
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