‘स्वच्छ भारत मिशन’ की धज्जियां, आवारा पशुओं की तड़प और संक्रामक बीमारियों के साए में आम जनजीवन

औरैया (बिधूना):
उत्तर प्रदेश शासन की ओर से ‘स्वच्छ भारत मिशन’, जनस्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भले ही तमाम योजनाएं चलाई जा रही हों, लेकिन जनपद के बिधूना में नगर पंचायत की संवेदनहीनता ने इन सभी दावों की पोल खोलकर रख दी है। किशनी रोड स्थित सरकारी आईटीआई कॉलेज के ठीक समीप पूरे नगर का कचरा डंप किया जा रहा है। शिक्षा के जिस मंदिर में बैठकर युवा अपने भविष्य की नींव रखते हैं, उसके इर्द-गिर्द फैला कूड़े का यह विशाल पहाड़, उससे उठती विषैली गैसें और भयंकर सड़न इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि स्थानीय प्रशासन को न तो आम जनता की सांसों की फिक्र है और न ही युवाओं के भविष्य की।
पर्यावरण प्रदूषण और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों की खुली धज्जियां:
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत यह स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी आवासीय या शैक्षणिक क्षेत्र के पास कचरा डंप नहीं किया जा सकता और कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण अनिवार्य है। इसके बावजूद नगर पंचायत खुलेआम इन विधिक प्रावधानों की धज्जियां उड़ा रही है। इस सड़ते कचरे से उत्पन्न होने वाला लीचेट (दूषित पानी) भूमिगत जल को प्रदूषित कर रहा है, वहीं हवा में फैलने वाले हानिकारक सूक्ष्म कण और बदबू से आसपास के निवासियों और विद्यार्थियों का सांस लेना भी दूभर हो गया है। प्रशासन की यह लापरवाही सीधे तौर पर पर्यावरण और लोक स्वास्थ्य अधिनियमों का खुला उल्लंघन है।
आवारा पशुओं की पीड़ा और विकराल होता सड़क हादसों का संकट:
इस कचरे के ढेर पर मंडराते बेजुबान आवारा पशुओं का जमावड़ा केवल गंदगी नहीं फैला रहा, बल्कि एक भीषण त्रासदी को जन्म दे रहा है। खुले में फेंके गए प्लास्टिक, पॉलीथिन और सड़े-गले खाद्य पदार्थों को खाने के लिए मजबूर ये मवेशी गंभीर बीमारियों का शिकार होकर तड़प-तड़प कर मरने को विवश हैं, जो पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के दायरे में भी गंभीर लापरवाही है। इसके साथ ही, कचरे के बीच झुंड बनाकर खड़े रहने वाले ये पशु आए दिन मुख्य मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों के सामने आ जाते हैं, जिससे छात्र-छात्राओं, दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों के साथ गंभीर दुर्घटनाएं हो रही हैं। कई लोग इन हादसों में अपनी जान गंवाने या गंभीर रूप से घायल होने की कगार पर पहुंच चुके हैं।
प्रशासनिक लाचारी पर फूटा गुस्सा, उग्र आंदोलन की चेतावनी:
इस व्यवस्थागत लाचारी और प्रशासनिक हठधर्मिता के खिलाफ अब छात्रों और आम नागरिकों का सहनशीलता का बांध टूट गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के तहसील संयोजक ऋषभ तिवारी ने कड़े तेवर दिखाते हुए प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक तरफ सरकार स्वच्छता का ढिंढोरा पीटती है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन अपनी कार्यकुशलता की कमी को छुपाने के लिए आम जनता के जीवन, पर्यावरण और युवाओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विद्यार्थी परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों ने तत्काल इस कचरे के पहाड़ को हटाकर यहाँ स्वच्छता और स्थायी निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की, तो छात्र संगठन और स्थानीय नागरिक सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होंगे। इसके विरोध में जोरदार धरना-प्रदर्शन करते हुए तहसील का घेराव किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण और नैतिक जिम्मेदारी निकम्मे और लापरवाह निकाय प्रशासन की होगी।
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