सीएमओ डॉ. राजीव निगम, चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्रा, बाबू प्रेमबहादुर सिंह और प्रमोद कुमार मिश्र पर गरीबों के नाम पर पैसे के बंदरबांट का गंभीर आरोप

अजीत मिश्रा (खोजी)
विशेष रिपोर्ट: बस्ती के स्वास्थ्य महकमे में लूट की छूट, शिकायतों का पुलिंदा पर कार्रवाई ‘शून्य’
- डीएम और सीडीओ द्वारा जिला स्वास्थ्य समिति की बैठकों में कार्यों की समीक्षा न करने से भ्रष्ट अधिकारियों को मिल रही है खुली छूट
- शिकायतकर्ता द्वारा साक्ष्य और शपथ-पत्र के साथ शिकायत देने के बावजूद, निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं (आईएस अधिकारी डॉ. अल्का वर्मा) की बार-बार रिपोर्ट मांगने पर भी अधिकारी परीक्षण करने से कतरा रहे हैं
- चीफ फार्मासिस्ट एवं एमएसडी स्टोर प्रभारी अजय मिश्रा आय से अधिक चल-अचल संपत्ति के मामले में लोकायुक्त की रडार पर
- लोकायुक्त सचिव सीमा बंसल द्वारा अजय मिश्रा को नोटिस जारी कर 14 अक्टूबर तक परिवार की संपत्ति और आय-व्यय का ब्योरा साक्ष्य सहित देने का निर्देश
बस्ती। गरीबों के इलाज के नाम पर आबंटित सरकारी पैसे पर डाका डालने का खेल बस्ती के स्वास्थ्य विभाग में किस कदर हावी है, यह किसी से छिपा नहीं है। स्वास्थ्य महकमे में बैठे सफेदपोश नुमाइंदों से लेकर बाबू और फार्मासिस्ट तक, हर कोई अपनी जेबें भरने में मस्त है।
एनएचएम में फर्जीवाड़े का खेल, अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत मिलने वाले बजट की बंदरबांट में केवल निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि महकमे के बड़े चेहरे भी बेनकाब हो रहे हैं।
- फर्जी विकलांग प्रमाण-पत्र: एनएचएम के पटल सहायक संदीप राय पर फर्जी विकलांग प्रमाण-पत्र के सहारे मलाई काटने का आरोप है। एक साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी सीएमओ कार्यालय या राज्य चिकित्सा परिषद द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
- गरीबों के हक पर डाका: सीएमओ डॉ. राजीव निगम, चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्रा, बाबू प्रेमबहादुर सिंह, प्रमोद कुमार मिश्र और संदीप राय जैसे सिंडिकेट पर मरीजों के बजट में हेराफेरी के गंभीर आरोप लग चुके हैं।
- निगरानी के नाम पर खानापूरी: जिला स्वास्थ्य समिति की बैठकों में डीएम और सीडीओ द्वारा जमीनी समीक्षा न किए जाने से इन भ्रष्ट तत्वों को खुली छूट मिल रही है।
“जब शिकायतकर्ता हलफनामे और साक्ष्य के साथ भ्रष्टाचार उजागर कर रहे हैं, तब भी विभागीय अधिकारी पुनः परीक्षण कराने से कतरा रहे हैं। आखिर लिफाफे के फेर में कब तक स्वास्थ्य सेवाओं का सौदा होता रहेगा?”
आय से अधिक संपत्ति मामले में लोकायुक्त की रडार पर ‘अजय मिश्रा’
चीफ फार्मासिस्ट एवं एमएसडी स्टोर प्रभारी अजय मिश्रा की मुश्किलें अब कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लोकायुक्त में चल रही जांच के बाद विभाग के इस ‘सिंडिकेट’ में खलबली मच गई है।
- लोकायुक्त का शिकंजा: लोकायुक्त सचिव सीमा बंसल द्वारा अजय मिश्रा को अपनी तथा अपने परिजनों की पांच वर्षों की चल-अचल संपत्तियों का संपूर्ण ब्योरा साक्ष्य सहित प्रस्तुत करने का नोटिस जारी किया गया है।
- गुटबाजी और चौतरफा विरोध: विभाग में अपने रसूख और आर्थिक लाभ के लिए अपनों को दरकिनार करने वाले इस गुट की कारगुजारियां अब खुद उन्हीं पर भारी पड़ रही हैं।
- मनी और पावर का नशा: विभाग के सूत्रों का कहना है कि जब से बाहर के ठेकेदारों को प्राथमिकता देकर मलाई छांटने का खेल शुरू हुआ है, तब से अंदरूनी जंग तेज हो गई है।
1. ‘एनएचएम’ के ‘संदीप राय’ भी ‘फर्जीवाड़ा’ में ‘फंसे’
- भ्रष्टाचार के आरोप: सीएमओ डॉ. राजीव निगम, चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्रा, बाबू प्रेमबहादुर सिंह, प्रमोद कुमार मिश्र और एनएचएम के पटल सहायक संदीप राय पर गरीबों के नाम पर पैसे के बंदरबांट और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं।
- जिला प्रशासन की भूमिका: लेख में यह भी उठाया गया है कि डीएम और सीडीओ द्वारा सीएमओ, आरसीएच, चीफ फार्मासिस्ट और एनएचएम के कार्यों की सही से समीक्षा या निगरानी न करने के कारण इन्हें मनमानी करने की खुली छूट मिल जाती है।
- संदीप राय का फर्जी प्रमाणपत्र मामला: एनएचएम के चर्चित बाबू संदीप राय पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी विकलांग प्रमाण-पत्र का इस्तेमाल किया है, और एक साल होने को है फिर भी सीएमओ/राज्य चिकित्सा परिषद लखनऊ ने इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
2. ‘आय’ से अधिक ‘चल-अचल’ संपत्ति में भी ‘फंसे’ अजय ‘मिश्र’
- लोकायुक्त जांच: चीफ फार्मासिस्ट एवं एमएसडी स्टोर प्रभारी अजय मिश्रा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि अब उनके और उनके परिवार के पास आय से अधिक चल और अचुल संपत्ति के मामले में लोकायुक्त की जांच चल रही है।
- लोकायुक्त का नोटिस: लोकायुक्त की सचिव सीमा बंसल ने अजय मिश्रा को नोटिस जारी कर 14 अक्टूबर तक अपनी और अपने परिवार की चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा साक्ष्य सहित तथा आय-व्यय का हिसाब देने को कहा है।
- आंतरिक कलह और कार्यशैली: लेख के अनुसार, अजय मिश्रा ने अपने कार्यकाल में बहुत से विरोधी बना लिए हैं और उन पर भ्रष्टाचार तथा पैसे कमाने के लिए ठेकेदारों को प्राथमिकता देने के गंभीर आरोप हैं।
बड़ा सवाल: आखिर कब जागेगा शासन?
स्वास्थ्य महकमे में नीचे से लेकर ऊपर तक फैला यह भ्रष्टाचार आम जनता की सेहत पर भारी पड़ रहा है। अगर फर्जीवाड़े और अवैध संपत्ति के मामलों पर त्वरित और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो यह गूंगी-बहरी व्यवस्था आम लोगों का बचा-कुचा भरोसा भी खो देगी।
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