
मोबाइल की आदत बना रही है बच्चों को वर्चुअल ओटिज्म का शिकार
आल ह्यूमंस सेव एंड फॉरेंसिक फाउंडेशन डिस्टिक वूमेन चीफ शिवानी जैन एडवोकेट ने विश्व आटिज्म दिवस पर कहा कि मोबाइल बच्चों को वर्चुअल ऑटिज्म का शिकार बना रहा है। 5 साल के कम आयु के बच्चों को स्मार्टफोन से दूर रखें। मोबाइल की आदत लगने से बच्चे वर्चुअल ऑटिज्म का शिकार हो रहे हैं शहर में ऐसे मामले प्रतिदिन सामनेआ रहे हैं।
चाइल्ड न्यूरोलॉजिस्ट डॉ अनूप कुमार ने कहा कि प्रतिदिन वर्चुअल ऑटिज्म के दो मामले उनके सामने आ रहे हैं। यह संख्या बढ़ भी सकती है जो चिंता का विषय है। यह कंप्यूटर, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट या किसी वीडियो गेम को स्क्रीन को लगातार देखने से होती है।
मां सरस्वती शिक्षा समिति के प्रबंधक डॉ एच सी विपिन कुमार जैन, संरक्षक डॉ आरके शर्मा, निदेशक डॉक्टर नरेंद्र चौधरी, डॉ प्रदीप जी, डॉ संजीव शर्मा, शार्क फाउंडेशन की तहसील प्रभारी डॉ एच सी अंजू लता जैन, आदि ने कहा कि एक समय में 30 मिनट के लिए फोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट बच्चों को देखने के लिए दें। इससे अधिक समय तक न चलाने दें। कोरोना काल के दौरान बच्चों का घरों से बाहर खेलने का सिलसिला कम होने के कारण बच्चों का मोबाइल चलाना अधिक हुआ है। तब से बच्चे इस समस्या से अधिक जूझ रहे हैं। ऑटिज्म शारीरिक दिव्यांगता है। इसके और भी कई अन्य कारण है। इसके लक्षण दो या तीन वर्ष की उम्र में दिखलाई पड़ते हैं। चिकित्सकों की सलाह है कि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को स्क्रीन वाले गैजेट से दूर ही रखें।
शिवानी जैन एडवोकेट
डिस्ट्रिक्ट वूमे
न चीफ











