

नई दिल्ली/भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व गृहमंत्री की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को सख्त निर्देश जारी करते हुए निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने को कहा है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि जांच में किसी भी स्तर पर ढिलाई या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामले से जुड़े आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और जनहित से जुड़े होने के कारण इसकी गहन जांच आवश्यक है। अदालत ने डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हुए जांच की प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, जांच की स्थिति रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा में न्यायालय के समक्ष पेश करने को भी कहा गया है।
अदालत की टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे कानून के शासन की जीत बताते हुए कहा कि अब सच सामने आएगा, वहीं सत्तापक्ष की ओर से न्यायालय के आदेशों का सम्मान करने की बात कही गई है।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दायरे में पूर्व गृहमंत्री के कार्यकाल से जुड़े कई अहम फैसले और कथित प्रशासनिक आदेश शामिल किए जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद राज्य की पुलिस और प्रशासनिक महकमे में भी सतर्कता बढ़ गई है।
अब सभी की निगाहें डीजीपी के नेतृत्व में होने वाली जांच और सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।







