मोरहाबादी में 23 अक्टूबर को जुटेंगे 50 हजार लोग, ग्राम सभा मंच का बड़ा ऐलान।।

मोरहाबादी में 23 अक्टूबर को जुटेंगे 50 हजार लोग, ग्राम सभा मंच का बड़ा ऐलान।।
*3 से 4 हजार ग्राम सभाओं के प्रतिनिधि होंगे शामिल, सरकार को सौंपा जाएगा 7 सूत्री मांगपत्र।।*
*रिपोर्टर/राशीद अंसारी*
बुढ़मू। ग्राम सभा मंच, झारखंड केंद्रीय समिति ने सरकार के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। 12 सितंबर को रांची जिले के बुढ़मू प्रखंड अंतर्गत सिदरौल में आयोजित केंद्रीय समिति की आम बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। मंच ने 23 अक्टूबर 2026 को रांची के मोरहाबादी मैदान में 50 हजार से अधिक लोगों की विशाल महासभा आयोजित करने का ऐलान किया है।
मंच के अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष सिप्रियन समाड की अध्यक्षता में हुई बैठक में रांची, रामगढ़, बोकारो, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा, लोहरदगा, लातेहार, चतरा और हजारीबाग समेत विभिन्न जिलों से करीब 150 प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में तय किया गया कि महासभा में राज्य के 3 से 4 हजार ग्राम सभाओं के 50 हजार से अधिक सदस्य जुटेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री, कल्याण मंत्री और राज्यपाल को आमंत्रित किया गया है। मंच के अनुसार मुख्यमंत्री की ओर से महासभा में शामिल होने का आश्वासन भी मिला है। संबंधित विभागों को भी कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है।
"सरकार के सामने रखी जाएंगी 7 बड़ी मांगें"
महासभा के दौरान ग्राम सभा मंच सरकार को 7 सूत्री मांगपत्र सौंपेगा। इनमें वन अधिकार कानून के तहत सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन अधिकार पत्र (CFRR) जारी करने, वनाधिकार दावों के मामलों में कार्रवाई, मुंडारी खूंटकट्टी गांवों की पुनः मान्यता, गैरमजरुआ जमीन की लगान रसीद शुरू करने और विस्थापन-पुनर्वास की सुविधा देने जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।
मंच ने दलमा वन्यजीव अभयारण्य के ईको सेंसिटिव जोन से जुड़ी 2012 की अधिसूचना निरस्त करने तथा 136 गांवों में पक्के निर्माण पर लगी रोक हटाने की भी मांग उठाई है।
इसके अलावा पेसा नियमावली 2025 में पंचायत सेवक को ग्राम सभा का सचिव बनाए जाने के प्रावधान को हटाने और 2024 की नियमावली में शामिल कार्यकारिणी गठन के प्रावधान को पुनः जोड़ने की मांग की गई है।
"वन विभाग की कार्रवाई का भी मुद्दा उठेगा"
मंच ने लोहरदगा जिले के पेशरार प्रखंड अंतर्गत बाड़ी गांव में 80 असुर परिवारों को वन विभाग द्वारा कथित रूप से ट्रेंच खोदकर बेदखल किए जाने का मामला भी प्रमुखता से उठाया है। मंच का कहना है कि इन परिवारों ने वन अधिकार अधिनियम-2006 के तहत व्यक्तिगत और सामुदायिक दावे प्रस्तुत किए हैं। मंच ने संबंधित वन अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
बैठक में सुशील उरांव, सिप्रियन समाड, भरत सिंह मुंडा, बृहस्पति सिंह सोरदार, बलराम सोरदार, अशोक समेत कई प्रतिनिधि मौजूद थे।
23 अक्टूबर की महासभा को लेकर अब ग्राम सभा मंच ने व्यापक तैयारी शुरू करने का आह्वान किया है।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।







